जब तानपुरा को गदा बनाकर मंच से लगाई आवाज, ‘खींचो’
एक घटना याद करते हुए डॉ.चोपड़ा ने बताया कि मंच पर भीम का अभिनय करते समय तीजन बाई तानपुरा को गदा बना लेती थीं। वह उसी क्षण की तस्वीर लेना चाहते थे, लेकिन अभिनय में इतने खो गए कि कैमरे का बटन दबाना ही भूल गए। तभी मंच से तीजन बाई ने आवाज दी, ‘खींचो’। इसके बाद उन्होंने तस्वीर ली।तीजन बिना तानपुरा के नहीं गाती थीं।
नाना की कहानियों ने गढ़ी तीजनबाई की लोकगाथा
वरिष्ठ कवि योगेंद्र कुमार मिश्रा बताते हैं कि तीजनबाई की अधिकांश बचपन नाना के सान्निध्य में बीता। नाना उन्हें रोज रामायण, महाभारत और अन्य धार्मिक कथाएं सुनाया करते थे। इन्हीं कथाओं ने उनके मन में पांडवों की गाथाओं के प्रति गहरी रुचि जगाई, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी। बाद में उन्होंने गुरु झाड़ूराम से पंडवानी की विधिवत शिक्षा ली और मात्र 13 वर्ष की आयु में मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया।
एनसीजेडसीसी से रहा आत्मीय जुड़ाव
भारतीय लोककला की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) से विशेष जुड़ाव रहा। एक यादगार संयोग रहा कि केंद्र के आमंत्रण पर प्रयागराज में प्रस्तुति के दौरान ही उन्हें पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा हुई थी, जिसने इस अवसर को ऐतिहासिक बना दिया। 2017 में संगम तट पर राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘चलो मन गंगा जमुना तीर’ में तीजन बाई ने पंडवानी प्रस्तुति से हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया था। यही उनका प्रयागराज का आखिरी दौरा था।