प्रयागराज। प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29,334 विज्ञान-गणित शिक्षकों की भर्ती में स्नातक में बिना गणित अथवा विज्ञान एक विषय के शिक्षक बनने वाले प्रोफेशनल डिग्रीधारकों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। बेसिक शिक्षा परिषद ने बीएसए से ऐसे विज्ञान-गणित शिक्षकों का ब्योरा तलब किया है, जिन्होंने बिना विज्ञान अथवा गणित विषय के स्नातक पास करने के बाद भी नौकरी हासिल कर ली है।
बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से पहली बार परिषदीय विद्यालयों के 29,334 विज्ञान-गणित शिक्षकों की भर्ती में बड़े पैमाने पर प्रोफेशनल डिग्री धारक अभ्यर्थियों ने बीटीसी और टीईटी पास करके नौकरी हासिल कर ली थी। प्रोफेशनल डिग्री धारकों में बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी भी थे, जिनके पास स्नातक में विज्ञान अथवा गणित एक विषय के रूप में नहीं था। इन अभ्यर्थियों के बारे में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सहित अन्य संबंधित कार्यालयों में जब सुनवाई नहीं हुई तो कुछ अभ्यर्थियों ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बेसिक शिक्षा परिषद से ऐसे शिक्षकों के बारे में जानकारी मांगी है। फिलहाल विज्ञान-गणित के ये शिक्षक तीन वर्ष से अधिक समय से विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद के उप सचिव अनिल कुमार की ओर से 26 दिसंबर को जारी अपने आदेश में प्रदेश के सभी बीएसए से आठ जनवरी तक इस बारे में जानकारी मांगी गई है। परिषद की ओर से पत्र जारी होने के बाद प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने विभिन्न जनपदों में खंड शिक्षाधिकारियों को पत्र भेजकर 29334 विज्ञान-गणित सहायक अध्यापक भर्ती में सभी शिक्षकों के अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराने को कहा है। इसके आधार पर जांच करके बीएसए अपनी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा परिषद को भेजेंगे। उसी आधार परिषद सुप्रीम कोर्ट में विज्ञान-गणित शिक्षकों के बारे में अपना पक्ष रखेगी। बेसिक शिक्षा परिषद और बीएसए के पत्र के बाद प्रोफेशनल डिग्री के आधार पर उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने वालों में हड़कंप की स्थिति है।