इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सीनेट परिसर के मुख्य द्वार को बंद करने के विरोध में मध्यकालीन और आधुन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के सीनेट परिसर के मुख्य द्वार को कई दिनों से बंद किए जाने के विरोध में बुधवार को शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी खुलकर सामने आए।
मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विभाग में प्रो. एआर सिद्दीकी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न संकायों के 300 से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि 13 जुलाई से विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार कुछ उपद्रवी तत्वों ने बाधित किया है, जिससे छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रो. आशीष खरे ने कहा कि मुख्य द्वार बंद करना लोकतांत्रिक विरोध का तरीका नहीं है। इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और छवि प्रभावित हो रही है। बैठक में प्रो. एसआई रिजवी, प्रो. हर्ष कुमार, प्रो. अजय जेटली और प्रो. जया कपूर ने अपने विचार व्यक्त किए।
बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर नगर प्रशासन से मुख्य द्वार तत्काल खुलवाने, परिसर में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने और शिक्षकों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों की सुरक्षा की गारंटी देने की मांग की गई। वहीं तिलक भवन में हुई गैर-शिक्षक कर्मचारियों की बैठक में भी मुख्य द्वार बंद किए जाने का विरोध किया गया।