इलाहाबाद। जंक्शन पर रेलवे टिकट परीक्षक वीरेंद्र चौधरी हत्याकांड के दूसरे दिन शनिवार दोपहर चीरघर से लेकर सुभाष चौराहे तक आक्रोशित परिजनों ने हंगामा किया। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव को उठाने से इंकार कर दिया। उनका आरोप था कि आईकार्ड मिलने के बाद भी पुलिस ने शव को अज्ञात में चीरघर भेज दिया। घटना रात साढ़े दस बजे की होने के बाद भी पुलिस ने परिजनों को रात दो बजे सूचना दी। भीड़ का आक्रोश देखकर कई थानों की फोर्स के साथ पुलिस अफसर भी पहुंच गए। किसी तरह पुलिस अफसरों ने समझाकर परिजनों को मनाया। इसके बाद परिजन शव एसआरएन मोड़ पर रखकर सड़क जाम कर दिया। पुलिस ने किसी तरह जाम खुलवाया। आधे घंटे बाद वहां से आगे बढ़े तो सुभाष चौराहे पर चक्काजाम किया। आक्रोशित लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। सुभाष चौराहे पर चक्काजाम कर रहे लोगों से पुलिस की झड़प भी हुई। चक्काजाम में वीरेंद्र के सहकर्मी एक दर्जन से ज्यादा टिकट परीक्षक भी शामिल रहे। पोस्टमार्टम में 315 बोर के तमंचे से गोली मारने की बात सामने आई है। उसे सिर में पीछे से सटाकर गोली मारी गई थी। गोली आरपार हो गई थी। दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया।
गोली मारकर झाड़ी में छिप गया था कातिल
सड़क पर खून से लथपथ पड़े युवक को देखकर भीड़ जुट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लोग पुलिस को मामले सूचना दे रहे थे, तभी झाड़ी में छिपा एक युवक बाहर आकर भीड़ में खड़ा हो गया। पुलिस के आने की खबर पाकर वह अचानक से गायब हो गया। पुलिस उस संदिग्ध के बारे में पता लगा रही है। अंदेशा है कि वह बदमाशों का साथी हो सकता है। वहीं, कत्ल की वजह को लेकर घरवाले कुछ बोल नहीं रहे हैं। दोस्तों और रिश्तेदारों ने बताया कि वह बेहद सरल और मिलनसार स्वभाव का था। उसकी किसी से खुन्नस की बात लोगों के गले नहीं उतर रही है। ऐसे में वीरेंद्र के कत्ल की वजह क्या है। यह पता लगाना पुलिस के लिए एक चुनौती है।
चार सीसीटीवी कैमरे पर सब बंद
टिकट परीक्षक वीरेंद्र चौधरी के चाचा भरत चौधरी के घर से घटना स्थल के बीच पांच सौ मीटर की दूरी में चार जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एक स्कूल में भी सीसीटीवी कैमरा लगा है। लेकिन घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो पता चला कि चारों कैमरे बंद पड़े हैं। स्कूल में लगे कैमरे के बारे में पूछे जाने पर स्कूल प्रशासन ने बताया कि स्कूल बंद है तो कैमरा भी बंद कर दिया जाता है।
कॉल डिटेल से संदिग्ध नंबरों की पड़ताल
कत्ल के बाद बदमाश टिकट परीक्षक का मोबाइल भी उठा ले गए थे। पुलिस ने वीरेंद्र के मोबाइल नंबर की क ॉल डिटेल हासिल कर ली है। एसओ अशोक दुबे ने बताया कि सीडीआर से पता चला है कि वह क ई नंबरों पर देर तक बात करता था। कुछ नंबरों को चिह्नित कर पड़ताल की जा रही है। कई संदिग्ध नंबर कॉल डिटेल में पुलिस को मिले हैं। जिनसे जांच कर रही है।
एक दिन पहले था जन्मदिन
25 अगस्त को वीरेंद्र का जन्मदिन था। जन्मदिन पर दोस्तों और घरवालों ने उसे लंबी उम्र और खुशहाल जिंदगी की बधाई दी थी। वीरेंद्र के कत्ल की खबर सुनकर रात में ही पिता रामशंकर, मां मालती देवी और दोनों छोटे भाई आशीष, अभिषेक और गांव के लोगों के साथ न्याय विहार स्थित घर आ गए। वीरेंद्र की मौत से घर में कोहराम मचा है।
वीरेंद्र पर थी परिवार की जिम्मेदारी
वीरेंद्र तीन भाइयों और दो बहनों में बड़ा था। किसान पिता ने बड़ी उम्मीद के साथ उसे पढ़ाया था। उसने आठवीं के बाद से सीडीए पेंशन में ऑडीटर चाचा भरत चौधरी के साथ धूमनगंज में न्याय विहार कॉलोनी स्थित घर पर रहकर पढ़ाई की थी। सालभर पहले उसे रेलवे में नौकरी मिली तो घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं था। पिता इस बात से खुश से थे कि अब बेटा भी उनका हाथ बटाएगा। वीरेंद्र का छोटा भाई आशीष चौधरी बीकॉम, अभिषेक इंटर और छोटी बहन प्रतिभा आईटीआई कर रही है।
दिसंबर में है बहन की शादी, आई थी परीक्षा देने
वीरेंद्र ने नौकरी पाने के बाद बहन की धूमधाम से शादी करने की सोचा था। बड़ी बहन की दिसंबर में शादी है। वीरेंद्र की बड़ी बहन अनीता चौधरी गुरुवार को गांव से चाचा के घर आई थी। शुक्रवार को उसकी सीआरपीएफ क ी शारीरिक दक्षता परीक्षा थी। रात में जब भाई के कत्ल की खबर मिली तो वह दहाड़ मारकर रो पड़ी। रोते-रोते वह अचेत होकर गिर पड़ी।
एसपी सिटी से उलझने पर पिटा टीई
सुभाष चौराहे पर वीरेंद्र के परिजन और सहकर्मी शव रखकर चक्काजाम कर रहे थे। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने परिजनों को समझाया कि पुलिस जांच कर रही है, कोशिश है कि जल्द हत्यारों को पकड़ लिया जाए। एसपी सिटी और एसडीएम बातचीत कर रहे थे। तभी एक टीई आया और एसपी सिटी राजेश कुमार से उलझ गया। कई घंटे से चल रहे हंगामे से पुलिस परेशान थी। अफसर से बदसलूकी होते देख पुलिस को मौका मिल गया। इंस्पेक्टर महेश पांडेय और अन्य दरोगा उस पर टूट पड़े। पुलिस ने लाठी भांजकर भीड़ को खदेड़ दिया। हालांकि बाद में उसे गलती मानने पर छोड़ दिया गया।