जिन छोटे करदाताओं/व्यापारियों ने पांच सौ और हजार के नोट में तय सीमा से अधिक रकम बैंक खातों में जमा की और अब आयकर विभाग का नोटिस आ गया है तो परेशान न हों, क्योंकि इसका जवाब देने के लिए उन्हें आयकर विभाग नहीं जाना होगा। न ही अफसर उन्हें कार्यालय बुलाएंगे। ऐसे लोग सिर्फ ई-मेल या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से नोटिस का जवाब देंगे। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है।
नोटबंदी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपने पास रखे पांच सौ और हजार के नोट बैंक खातों में जमा किए। बैंकों से वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर) प्राप्त होने के बाद आयकर मुख्यालय से बड़ी संख्या में छोटे करदाताओं, व्यापारियों को भी नोटिस जारी कर दिया। इनमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं जिन्होंने नौ नवंबर से 30 दिसंबर के बीच अपने खातों में 50 हजार रुपये या उससे कुछ अधिक रकम जमा की। जिले में ऐसे दो लाख से अधिक लोगों को नोटिस भेजा गया है। वित्त मंत्रालय को शिकायत मिल रही थी कि ऐसे करदाताओं, व्यापारियों को कार्यालय बुलाकर परेशान किया जा रहा है।
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसे लोगों को परेशान नहीं करना है बल्कि जिन्होंने रकम जमा कर दी है, उनसे जवाब लेते हुए समस्या का समाधान करना है। यह कदम इंस्पेक्टर राज खत्म करने के लिए उठाया गया है। वित्त मंत्रालय के कर सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल का कहना है कि मंत्रालय के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) ने पिछले दिनों आदेश जारी किया है कि ऐसे छोटे करदाता/व्यापारी, पेशेवरों आदि पर जवाब देने के लिए कार्यालय आने का दबाव न डाला जाए। बताया कि किसी मामले में संदेह है तो उससे संबंधित व्यक्ति को बुलाने के लिए आयकर अधिकारी को ज्वाइंट कमिश्नर से अनुमति लेनी होगी। हालांकि संदेह होने पर निदेशक सीधे जांच कर सकते हैं।