प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर कुंभ की अमृतधार में स्नान के लिए एक बार फिर भक्ति का जन प्रवाह प्रस्फुटित हुआ है। हर मन में प्रयाग और हर दिल में संगम की पवित्रता का भाव लेकर लोग त्रिवेणी में डुबकी लगाकर जीवन धन्य बनाने के लिए उमड़ पड़े हैं। इसी दौरान टाटा नमक ने अनूठी पहल करते हुए बुजुर्गों और विकलांग तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए एक कदम उठाया है।
रामायण में वर्णित श्रवण कुमार की प्रसिद्ध कहानी से प्रेरित होकर टाटा नमक ने “कुंभ के श्रवण” नामक अनूठी पहल के माध्यम से विकलांग और बुजुर्गों की कुंभ यात्रा को पूरा करने के लिए 'सेवा वाहन' नाम की पालकी तैयार की। यह पालकी बुजुर्गों और विकलांग तीर्थयात्रियों को लेटे हुए हनुमान मंदिर से त्रिवेणी संगम तक ले जाकर स्नान करा रही है और वापस ले जा रही है।
टाटा नमक ने यह अनूठी पहल 1 मार्च को शुरू की थी जो 4 मार्च यानि महाशिवरात्रि तक जारी है।
कुंभ यात्रा को सही मायने में दान और संगम की पवित्र जल में डुबकी लगाकर स्नान के रूप में पूरा किया जाता है। टाटा नमक के ये श्रवण कुमार न केवल बुजुर्गों को कुंभ यात्रा पूरा करने में मदद कर रहे हैं, बल्कि उन्हें एक 'दान कलश' भी प्रदान कर रहे हैं, जिसमें टाटा सॉल्ट और कुछ अनाज है। जिसे बुजुर्ग और विकलांग पंडितों या गरीबों को दान कर अपनी कुंभ यात्रा का पुण्य कमा रहे हैं।
कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार होने के कारण बेहद लोकप्रिय है। ऐसे में टाटा नकम की इस पहल से बुजुर्ग और विकलांग तीर्थयात्रियों को आध्यात्मिक अनुभव से वंचित होने और अपनी यात्रा पूरी करने में मदद मिल रही है। 'कुंभ के श्रवण' के साथ अब वह अपनी महाकुंभ यात्रा को आराम से और अपनी वास्तविक भावना के साथ पूरा कर रहे हैं।
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए सागर बोके, प्रमुख, विपणन, उपभोक्ता उत्पाद व्यवसाय, टाटा केमिकल्स लिमिटेड, ने बताया कि, 'कुंभ एक बहुत ही शुभ अवसर है जहां देश भर से तीर्थयात्री पवित्र गंगा में डुबकी लगाने आते हैं। बुजुर्गों और विकलांगों को अंतिम मील की दूरी को कवर करने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जहां किसी भी वाहन की अनुमति नहीं है। टाटा साल्ट, जिसे प्यार से "देश का नमक" नाम दिया गया है, ने इस अंतिम मील की यात्रा को सुविधाजनक बनाया जिससे उपभोक्ताओं के साथ दिलचस्प तरीके से जुड़ाव हुआ। टाटा नमक अपने उपभोक्ताओं के साथ सार्थक तरीके से जुड़ने में विश्वास करता है, जिससे उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।'
वहीं टाटा साल्ट के मार्केटिंग अधिकारी देवेंद्र ने बताया कि, जो चलने में असमर्थ हैं उनको कुंभ मेले के पावन अवसर पर 'सेवा वाहन' से संगम घाट तक ले जाकर स्नान करवाते हैं। साथ ही उन्हें दानपात्र देतें हैं। जिससे स्नान के बाद दान के महत्व को बुजुर्ग पूरा कर पुण्य के भागी बन सके और उनकी कुंभ यात्रा सफल हो। इसके माध्यम से समाज में हम यह संदेश देना चाहते हैं कि जिस तरह श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता की सेवा की थी। उसी तरह लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करें।
एक श्रद्धालु ने इस अनूठी पहल के बारे में पूछने पर कहा कि, हमारे देश की परंपरा है कि हम अपने बुजुर्गों को कांधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा कराते हैं। यह देखकर हमें पुरानी परंपरा याद आ गई। यह बिल्कल भावुक कर देने वाला पल है। टाटा साल्ट की यह पहल श्रवण कुमार की यादें ताजा कर रही है।
एक बुजुर्ग महिला श्रद्धालु ने 'सेवा वाहन' के जरिए संगम स्नान करने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि, यह बहुत ही अच्छी पहल है। हम सोच रहे थे कि चलने में हमें कोई सहारा मिलता, टाटा साल्ट के सेवा वाहन ने हमें सहारा देकर संगम स्नान कराया। यह बहुत ही अच्छा अनुभव है। इसके लिए हम टाटा साल्ट को धन्यवाद देते हैं।