प्रमुख नतीजे
1- 26 फीसदी रोगियों को क्लिनिकली महत्वपूर्ण लिवर फाइब्रोसिस
2- 14 फीसदी को एडवांस्ड (गंभीर) फाइब्रोसिस
3- पांच फीसदी को पहले से ही सिरोसिस हो चुका था
4- बिना मोटापे वाले और बिना फैटी लिवर वाले रोगियों में भी फाइब्रोसिस पाया गया
5- मोटापा, डिस्लिपिडीमिया, कमजोर किडनी फंक्शन और लंबे समय से मधुमेह होना मुख्य कारण
यह अध्ययन डायबिटीज इंडिया के डायबिटीज और लिवर इंटरेस्ट ग्रुप के तहत 48 चिकित्सकों, मधुमेह विशेषज्ञों और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स की राष्ट्रव्यापी टीम ने पूरे देश में किया। वहीं, जनपद में करीब 30 फीसदी डायबिटीज के रोगियों में लिवर से संबंधित परेशानी पाई गई। ऐसे में खानापान मे सतर्कता के साथ लिवर फाइब्रोस्कैन की जांच भी जरूरी है। - डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, मधुमेह रोग विशेषज्ञ, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।