फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुरेंद्र कोली की फांसी पर 23 दिसंबर तक रोक

Mon, 01 Dec 2014 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
नोएडा के निठारी कांड में फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली को कुछ और दिन के लिए जिंदगी की मोहलत मिल गई है। कोली की फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने पर सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी की सजा के अमल पर 23 दिसंबर तक रोक बढ़ा दी है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने सोमवार एक दिसंबर तक सजा पर रोक लगाई थी। याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं हो पाने के कारण इस अवधि को बढ़ा दिया गया। याचिका पर अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी। इस दौरान अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सभी पक्षकारों को 12 दिसंबर तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन



पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट (पीयूडीआर) और सुरेंद्र कोली ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अभियुक्तों के अधिकारों और सुप्रीमकोर्ट द्वारा हाल ही में दया याचिकाओं के निस्तारण को लेकर दिए गए आदेशों के जरिए बहस को बढ़ाया गया। दोनों याचिकाओं पर पीयूडीआर के वकील ने बहस की। याची के वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा कोली की अपील खारिज किए जाने के बाद उसकी दया याचिका को लेकर रिपोर्ट भेजने में अनावश्यक समय लिया। डीएम से लेकर शासनस्तर और राज्यपाल तथा राष्ट्रपति द्वारा याचिका के निस्तारण में अत्याधिक समय लगाया गया। याचिका के निस्तारण में मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया गया।
विज्ञापन


इसलिए नहीं होनी चाहिए फांसी
पीडीयूआर के वकील ने कोली की फांसी को उम्रकैद में तब्दील करने के लिए जो मुख्य आधार लिए हैं उनके अनुसार-
0 कोली की अपील सुप्रीमकोर्ट द्वारा खारिज होने के बाद दया याचिका के निस्तारण में तीन वर्ष तीन माह का समय लगा।
0 मौत की सजा पाए व्यक्ति को मृत्यु के लिए इतने समय तक इंतजार कराना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विधि शास्त्र के विरुद्ध है।
0 जेल अधीक्षक और डीएम गाजियाबाद ने दया याचिका और अपनी रिपोर्ट भेजने में एक वर्ष पांच माह का लंबा समय लिया।
0 एक माह गृह विभाग को भेजने में लगा फिर 15 दिन विभाग पहुंचने में लगे।
0 दया याचिका के निस्तारण में प्रदेश सरकार ने कुल एक वर्ष आठ का समय लिया।
0 राष्ट्रपति के पास इसे भेजने में तीन माह का और समय लगा। याचिका खारिज में कुल समय तीन वर्ष तीन माह लगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें