फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : बच्चों का यौन शोषण ही नहीं, उससे जुड़ी वीडियो- फोटो डाउनलोड करना, देखना भी अपराध

Sun, 04 Oct 2026 02:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को डाउनलोड करना, देखना या अपने पास रखना भी कानून के तहत अपराध हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले का हिंदी अनुवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी ई-पुस्तिका के छठे संस्करण में प्रकाशित किया है। फैसले में बाल यौन शोषण से बचाव के लिए जागरूकता, यौन शिक्षा, पीड़ितों को सहायता और जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान पर भी जोर दिया गया है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के हिंदी अनुवाद पर आधारित ई पुस्तिका का विमोचन करते न्यायमूर्तिगण। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बच्चों का यौन शोषण ही नहीं उससे जुड़ी सामग्री डाउनलोड कर देखना और पास रखना भी अपराध हो सकता है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस बनाम हरीश जैसे चर्चित में बाल अपराधों से जुड़े दिए ऐसे फैसलों का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी ई पुस्तिका के छठे संस्करण में किया है। इस पुस्तिका का विमोचन न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह, न्यायमूर्ति समीर जैन और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने किया है।

विज्ञापन


इससे पहले इस शृंखला में चौरीचौरा, केशव सिंह, आगरा षड्यंत्र, कानपुर बम धमाका और राज नारायण बनाम इंदिरा नेहरू गांधी जैसे ऐतिहासिक मामलों के फैसलों का हिंदी अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री को लेकर महत्वपूर्ण बात कही थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ऐसी सामग्री को डाउनलोड करना, देखना या अपने पास रखना भी कानून के तहत अपराध हो सकता है।

कोर्ट ने ‘चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉयटेशन एंड एब्यूज मैटेरियल’ शब्द इस्तेमाल करने को कहा था। फैसले में बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए स्कूलों में जागरूकता और यौन शिक्षा, पीड़ितों को सहायता, जागरूकता अभियान तथा जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान करने जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया। ई-पुस्तिका अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, विधि छात्रों, शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए उपयोगी होगी। इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट के ई-इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका टैब पर निशुल्क पढ़ा जा सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें