पुरवइया का जोर सूरज को दहकने का मौका दे रहा है और हर दिन 4 डिग्री सेल्सियस की रफ्तार से अधिकतम तापमान बढ़ रहा है। वहीं धूप तेज होने के बाद भी न्यूनतम पारा लुढ़ककर 4.5 डिग्री पर आ गया है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि ऐसी परिस्थितियों में कोहरा कहर बरपाएगा। पारा लुढ़कने से गलन भी बढ़ेगी।
रविवार को कई दिन बाद ठीक से सूरज तेवर में रहा। बिना हवा के खिली धूप लोगों को राहत देने वाली रही। शाम को एक बार फिर सर्द हवाओं ने लोगों को टोपी, मफलर, दस्ताने पहनने पर मजबूर किया। शनिवार के मुकाबले न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री सेल्सियस से लुढ़ककर 4.5 पर आ गया। शुक्रवार से अधिकतम तापमान चार डिग्री की औसत वृद्धि की दर से बढ़ा। ऊपर का पारा 22.2 डिग्री पर पहुंच गया। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मकर संक्रांति तक ठंड के तेवर बदलते रहेंगे लेकिन परिस्थितियां ऐसी हैं कि कोहरा सताएगा।
रविवार का दिन खिली धूप के चलते काफी खुशनुमा रहा। मॉर्निंग वॉक करने वालों ने बताया कि सुबह घना कोहरा था लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते ठंड का असर जाता रहा। दिन में तो बर्फीली हवाओं पर ब्रेक रहा लेकिन चार बजे के करीब मौसम पलटा और ठंडी हवाओं के झोंकों ने लोगों को मफलर बांधने और गर्म टोपी पहनने के लिए मजबूर कर दिया। शाम तक ठंड और बढ़ गई।
ठंड और कोहरे से माघ मेला क्षेत्र में कल्पवास कर रहे लोगों और संक्रांति की तैयारी में जुटे अफसरों, कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ी हैं। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा के मुताबिक हिमालय और हिमाचल में हो रही बर्फबारी से आसार बने हैं कि अभी सप्ताह भर पछुआ विक्षोभ का दूसरा उतरता चरण ठंड का एहसास कराता रहेगा। दिन में धूप खिलेगी लेकिन रात में कोहरा घना ही होगा।
भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिकों ने अगले 48 घंटों में घना कोहरा छाने की संभावना जताते हुए अलर्ट घोषित किया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कोहरे के दौरान सफर करने में दृश्यता कम होगी, इसलिए सावधानी बरतनी होगी। दिन का तापमान धड़ाम, अधिकतम पारे में पिछले दो दिन से चार फिर चार डिग्री का औसतन उछाल, आर्द्रता (नमी) का स्तर अधिकतम और न्यूनतम 100 फीसदी का होना, मौसम विज्ञानियों के लिए किसी हैरत से कम नहीं है। मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एसएस ओझा के मुताबिक आर्द्रता का एक समान होना जलवायु विज्ञान के लिए अनोखा विषय है। फिलहाल नमी के अधिकतम और न्यूनतम स्तर में एक तिहाई अंतर क्रमश: 100 और 35 है। ऐसे में संभावित संघनन को पूरब की हवाएं प्रभावित करेंगी। बादल हटने से धूप खिल तो रही है, पाला पड़ने के साथ कोहरा छाया रहा तो बूंदाबांदी संभावित है। इस क्रिया को सुबह धूप निकलने तक पेड़-पौधों की पत्तियों पर देखा जा सकता है। रात में दोपहिया चलाने वालों की जैकेट और स्वेटर पर पानी की सूक्ष्म बूंदें देखी जा सकती हैं। उन्होंने आसार जताए कि तेज धूप के साथ यदि बादल छाए तो बूंदाबांदी भी हो सकती है।