इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेशबंदी में दर्ज परिवाद पर एसीजेएम मुरादाबाद की ओर से जारी समन रद्द कर दिया है। कोर्ट ने तीन माह में नए सिरे से आदेश पारित करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने मुरादाबाद के सुरेंद्र कुमार कात्याल की ओर से समन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा, प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता चंद्रावती ने कोर्ट में स्वच्छ हृदय से नहीं आई हैं।
मामला मुरादाबाद के नागफनी थाना क्षेत्र का है। 2016 मे याची व शिकायतकर्ता चंद्रावती के बीच 15 लाख रुपये में संपत्ति बेचने का मौखिक करार हुआ। बदले में शिकायतकर्ता ने भुगतान के लिए याची के नाम चेक जारी किया था। जो अनादृत हो गया, जिस पर याची ने एनआई एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। 29 अप्रैल 17 को कोर्ट ने सम्मन जारी किया है।
उससे बचने के लिए पांच साल बाद शिकायतकर्ता ने याची के खिलाफ नागफनी थाने में धोखाधड़ी और भयादोहन का परिवाद दाखिल किया। कहा कि उसका चेक बुक खो गया था। याची ने फर्जी हस्ताक्षर कर चेक बैंक में जमा किया है। मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर याची के खिलाफ सम्मन जारी किया है।
याची अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी ने दलील दी कि पेशबंदी में शिकायतकर्ता ने मुकदमा दर्ज कराया है। चेक अनादर मामले की जानकारी ट्रायल कोर्ट को जानबूझकर नहीं दी। मजिस्ट्रेट ने इन तथ्यों पर विचार किए बिना सम्मन जारी किया है। जो अवैधानिक है।