चीनी की बढ़ती कीमत ने एक बार फिर चाय और मिठाई का स्वाद बिगाड़ना शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में थोक बाजार में चीनी का भाव प्रति क्विटंल 150 रुपये तक बढ़ गया। इसकी वजह से फुटकर बाजार में दो रुपये प्रति किलोग्राम तक की तेजी आ गई है। थोक व्यापारी इस इस तेजी के लिए चीनी मिल मालिकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि मिल मालिकों की मनमानी इसी तरह जारी रही तो अगले कुछ दिनों में चीनी का भाव और बढ़ेगा।
थोक बाजार में एक सप्ताह में चीनी का भाव 3850 रुपये प्रति क्विटंल तक पहुंच गया, जबकि इसके पहले 3700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव चीनी बिक रही थी। इसकी वजह से फुटकर बाजार में 38 रुपये से बढ़कर चीनी का भाव प्रति किलोग्राम 40 रुपये तक पहुंच गया। अरहर दाल का भाव पिछले कुछ माह से स्थिर होने के बाद अब चीनी के भाव में आ रही तेजी से घर का बजट बिगड़ने लगा है। हालांकि अभी स्थिति बिगड़ी नहीं है, लेकिन चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकारों को तत्काल कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
गल्ला का थोक कारोबारी सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि चीनी मिल मालिकों पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं है। मिल मालिक मनमानी कर चीनी का भाव बढ़ा रहे हैं। इसी वजह से पिछले एक सप्ताह में बाजार में तेजी का रुख है। उनका कहना है कि मिल मालिकों पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार ने अभी से कदम न उठाए तो आने वाले दिनों में चीनी का भाव 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है।