स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में 13 वर्षीय किशोर की खराब हो चुकी यूरेटर नली को दूरबीन विधि से बदलकर यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने नई उपलब्धि हासिल की है। करीब चार घंटे से अधिक चले ऑपरेशन के दौरान दो तिहाई से अधिक यूरेटर नली को यूरिन की थैली से गुर्दे तक जोड़ा गया।
वहीं, ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह से ठीक है और उसे फॉलोअप में रखा गया है। चिकित्सकों का कहना है कि यह काफी जटिल ऑपरेशन था। निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन में करीब पांच लाख रुपये खर्च होते हैं।
एसआरएन के साइकिल स्टैंड के कर्मचारी के बेटे अनुज पाल को पिछले कई दिनों से बुखार व कमर के दाहिनी तरफ दर्द की शिकायत थी। बच्चे को यूरोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रीश मिश्रा को दिखाया गया। वहीं, जांच में यूरेटर नली के दो तिहाई खराब होने की जानकारी मिली। इसके बाद चिकित्सकों ने नीचे से पाइप डालने की कोशिश की, मगर सफलता नहीं मिली।
वहीं, गुर्दे को क्रियाशील देखते हुए कमर से बाईपास परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (पीसीएनएल) ट्यूब डाली गई, ताकि यूरिन कमर के रास्ते से पास होती रहे और किडनी सुरक्षित रहे। करीब डेढ़ महीने बाद मरीज का दूरबीन विधि से ऑपरेशन किया गया। इस दौरान 15 सेमी नली को यूरिन थैली से जोड़ते हुए गुर्दे के सुरक्षित यूरेटर नली से जोड़ा गया। इस विधि को बोअरी फ्लैप कहा जाता है।
वहीं, बच्चे को पांच दिन तक निगरानी में रखा गया। उसके बाद छुट्टी दे दी गई। जबकि खराब नली को बॉयोप्सी जांच के लिए भेजा गया है। क्योंकि चिकित्सकों को टीबी के कारण यूरेटर नली के सुकड़ने की संभावना नजर आ रही है। वहीं, मरीज को फॉलोअप में रखा गया है। इसके अलावा संक्रमण को रोकने और जल निकाली के लिए गुर्दें में डाली गई डीजे स्टेंट को 15 से 20 दिनों में निकाल लिया जाएगा।
यह दूरबीन विधि से किए गए जटिल ऑपरेशनों में से एक है। ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह से ठीक है। वहीं, यूरेटर नली क्यों खराब हुई, यह बॉयोप्सी की रिपोर्ट आने बाद ही पता चल पाएगा।
-डॉ. श्रीश मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर यूरोलॉजी विभाग, एसआरएन अस्पताल।