अभ्यर्थियों ने गिनाए मानकीकरण के नुकसान
- आयोग ने सिर्फ पर्सेंटाइल स्कोर का फॉर्मूला सार्वजनिक किया है। मानकीकरण कैसे होगा, यह स्पष्ट नहीं किया है।
- एक परीक्षा के लिए सामान्य अध्ययन के दो अलग-अलग पेपर होंगे। यह कैसे तय होगा कि सामान्य अध्ययन का कोई भी सवाल किसके लिए कठिन और किसके लिए आसान है।नॉर्मलाइजेशन के फॉर्मूले के अनुसार, जिस शिफ्ट में उपस्थित अभ्यर्थियों की संख्या कम होगी, वहां पर्सेंटाइल स्कोर उच्च होगा। ऐसे में नाॅर्मलाइजेशन के किस फार्मूले के तहत एक समान मूल्यांकन संभव है।
- आयोग ने जनसूचना अधिकार के तहत एक सवाल के जवाब में बताया था कि पीसीएस-2019 और 2020 की प्रारंभिक परीक्षा में 38 सवाल गलत होने पर बदले गए थे। भविष्य अलग-अलग शिफ्ट में होने वाली परीक्षाओं में गलत सवाल पूछे गए तो मानकीकरण कैसे होगा।
- प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह आकलन कर पाना मुश्किल हो कि मुख्य परीक्षा के लिए सफल होंगे या नहीं।
न्यायालय होगा आखिरी विकल्प
अभ्यर्थियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट कहा है कि भर्ती के बीच में नियम नहीं बदले जा सके। अभ्यर्थी पहले आयोग के अध्यक्ष और सचिव के समक्ष अपनी बात रखेंगे। वहां सुनवाई नहीं हुई तो अभ्यर्थी गार्जियन के रूप में सीधे मुख्यमंत्री को समस्या बताएंगे। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो आखिरी विकल्प न्यायालय होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 10 हजार का ग्रुप
लंबे समय बाद अभ्यर्थियों का ऐसा आंदोलन हो रहा है, जिसका कोई नेतृत्वकर्ता नहीं है। इसमें हर अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से शामिल है। आंदोलन के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलिग्राम में 10 हजार अभ्यर्थियों का ग्रुप बना है। यहअभ्यर्थी 11 नवंबर को प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
परीक्षा के लिए मिली सिर्फ तारीख पर तारीख
अभ्यर्थियों का कहना है कि पीसीएस परीक्षा के लिए उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख मिली है। पहले 17 मार्च, 2024 को परीक्षा होनी थी, लेकिन आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक के बाद यह परीक्षा जून, फिर अक्तूबर और अब दिसंबर में प्रस्तावित की गई है।
भर्ती नहीं, छलावा करती है भाजपा : अखिलेश यादव
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभ्यर्थियों को समर्थन देते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भर्ती नहीं, छलावा करती है और जब एक छल पकड़ा जाता है तो भाजपाई दूसरा धोखा ले आते हैं। वहीं, कांग्रेस ने भी अभ्यर्थियों को समर्थन दिया है।
अखिलेश यादव ने लिखा कि अभ्यर्थी अब भाजपा की साजिश को भांप गए हैं, इसीलिए उसके खिलाफ आंदोलनरत हैं। हम उनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाते हैं और अभ्यर्थियों की जायज मांग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। दरअसल, यह भाजपा की चाल है कि युवाओं को सरकारी नौकरी न मिले और वो बेरोजगार ही रहें, एक दिन सस्ते में मजदूरों की तरह काम करने पर मजबूर हो जाएं।
अब पढ़ा-लिखा लेकिन बेरोजगार युवा भाजपा का यह चुनावी दुष्चक्र समझ गया है और भाजपा की मंशा भी, इसीलिए वो अब चुनाव में भाजपा को हराने के लिए मुट्ठी बांध कर संकल्प ले रहा है। भाजपा का भविष्य और युवाओं का भविष्य दो विरोधाभासी बातें हैं।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्र आदेश शर्मा को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय ने समर्थन पत्र सौंप कर कहा है कि इस मुद्दे पर जल्द ही राष्ट्रीय नेतृत्व से छात्रों की मुलाकात कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस आंदोलन में छात्रों के साथ कदम से कदम मिलाकर लड़ाई के लिए तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि आयोग को अभ्यर्थियों की मांग मान लेनी चाहिए।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने किया समर्थन
छात्रों के आंदोलन को बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और जिला अधिवक्ता संघ ने भी समर्थन दिया है। बार कौंसिल के उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मिश्र ‘रज्जू’ की ओर से अलग-अलग जारी समर्थन पत्र में कहा गया है कि 11 नवंबर को आयोग पर प्रस्तावित छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हैं।