आयोग अध्यक्ष के खिलाफ आयोजित सभा और मार्च में छात्रों और प्रतियोगियों ने पूरा धैर्य दिखाया। जिला और पुलिस के अफसरों का भी मानना है कि यदि पुलिस लाठीचार्ज न करती तो तोड़फोड़ और आगजनी बच जाती।
छात्रों को पुलिस ने हर जगह रोका लेकिन वे रास्ता बदलते रहे। छात्रों के बीच में ही एक टीम ऐसी रही जो शांतिपूर्वक आंदोलन की अपील करते हुए चल रही थी। छात्रों का हुजूम सिविल लाइंस बस अड्डे की तरफ बढ़ा तो सभी सकते में आ गए लेकिन वहां भी हर छात्र खुद में नियंत्रित दिखा। आगे-आगे चलने वाले प्रतियोगी रास्ते में पड़े ईंट-पत्थर हटाते हुए चल रहे थे, जिससे कि कोई छात्रा आपा न खो दे।
सिविल लाइंस बस अड्डे के बाहर जुलूस पहुंचने पर तो कुछ छात्रों ने मानव शृंखला बनाकर प्रतियोगियों को उधर जाने से रोक दिया। इसके अलावा पुलिस की जीप तथा रेलिंग पर चढ़कर भी छात्र अपील करते रहे कि आंदोलन में एक पत्थर भी नहीं चलना चाहिए। छात्रों को भय था कि कुछ बाहरी तत्व भी इसमें घुस गए हैं और माहौल बिगाड़ना चाहते हैं लेकिन कहीं भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। हालांकि सुभाष चौराहा पर शांतिपूर्वक धरना पर बैठे छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद उन्होंने धैर्य खो दिया और जमकर आगजनी की।