हॉस्टल न मिलने से हताश इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रजनीकांत यादव के आत्महत्या कर लेने से साथी छात्रों का गुस्सा भड़का हुआ है। बृहस्पतिवार को छात्रों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी गेट के सामने चक्काजाम कर दिया और डीएसडब्ल्यू कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी किया। छात्र मांग कर रहे हैं कि मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा और छात्रों को डेलीगेसी भत्ता दिया जाए।
छात्रसंघ अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, महामंत्री शिवम सिंह एवं उपमंत्री सत्यम सिंह सनी के नेतृत्व में छात्र बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे डीएसडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे और वहां धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का कहना था कि रजनीकांत को हॉस्टल नहीं मिल रहा था। वह अल्लापुर डेलीगेसी में रहता था लेकिन मकान मालिक कमरा छोड़ने के लिए दबाव बना रहा था। रजनीकांत कई बार केपीयूसी के अधीक्षक हौसला सिंह से भी मिला लेकिन उन्हें झिड़ककर भगा दिया गया। इससे हताश होकर रजनीकांत ने आत्महत्या कर ली। अपने साथी की मौत से भड़के छात्रों ने डीएसडब्ल्यू दफ्तर पर धरना-प्रदर्शन के बाद इविवि के लाइब्रेरी गेट के सामने सड़क पर चक्काजाम कर दिया।
चक्काजाम शुरू होते ही आनंद भवन और लल्ला चुंगी की ओर से आने वाला ट्रैफिक रोक दिया गया, इससे वाहनों की कतार लग गई। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स पहुंच गई। तकरीबन डेढ़ घंटे तक जाम लगा रहा। छात्रों की मांग थी कि मकान मालिक और केपीयूसी हॉस्टल के अधीक्षक को गिरफ्तार किया जाए। मृतक छात्र के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। छात्रों को डेलीगेसी भत्ता मिले और इविवि प्रशासन रूम रेंट एक्ट लागू कराने सकारात्मक पहल करे। कर्नलगंज सीओ सुकीर्ति माधव ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई होगी। इस आश्वासन के बाद छात्रों ने चक्काजाम समाप्त किया।
बृहस्पतिवार को हुए चक्काजाम के मामले में कर्नलगंज पुलिस ने 10 नामजद व 250 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें छात्रसंघ अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, महामंत्री शिवम सिंह, यतेंद्र सिंह, सदाकर खान, राहुल, रोहित, आनंद, अभिषेक यादव, अभिषेक आर्या व विवेक यादव शामिल हैं। आरोप है कि उपरोक्त ने मार्ग अवरुद्ध करने के साथ ही सरकारी कार्य में बाधा डाली। एएसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि नामजद आरोपियों में से कुछ ऐसे भी हैं जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उनके खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अल्लापुर में छात्र के सुसाइड मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। पताचला है कि पहले दिन तलाशी के बावजूद पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला। अगले दिन घरवालों ने कमरे में पहुंचकर कागजात खंगाले तब उन्हें यह मिला। सवाल यह है कि क्या सच में पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला या पुलिस ने जानबूझकर इसकी जानकारी नहीं दी।
अल्लापुर में रहने वाले रजनीकांत यादव ने 29 जनवरी को अपने कमरे में फांसी लगा ली थी। घटना के बाद जार्जटाउन पुलिस का कहना था कि कमरे में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। जबकि अगले दिन कमरे में पहुंचे परिजनों को डायरी में सुसाइड नोट मिला था। सवाल यह है कि तलाशी के बाद भी पुलिसवालों को सुसाइड नोट की जानकारी कैसे नहीं हुई। एक सवाल यह भी है कि कहीं कोई दबाव तो नहीं था जिसके चलते पुलिस ने सुसाइड नोट मिलने की बात छिपाए रखी। वरना ऐसे कैसे हो सकता है कि कमरे में सुसाइड नोट हो और तलाशी के बाद भी पुलिस को इसकी जानकारी न मिले। इस बारे में जार्जटाउन पुलिस का कहना है कि तलाशी ली गई थी लेकिन सुसाइड नोट नहीं मिला।
उधर पुलिस ने बृहस्पतिवार को मृतक छात्र के हैंडराइटिंग का नमूना जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया। एएसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि सुसाइड नोट छात्र ने ही लिखा या नहीं, हैंडराइटिंग की जांच से यह साफ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को आरोपी हॉस्टल अधीक्षक को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उनसे यह भी कहा गया है कि वह साथ में संबंधित कागजात भी लाएं। जिससे इसका पता चल सके कि छात्र हॉस्टल आवंटन के लिए अर्ह था या नहीं। उसने इसके लिए आवेदन किया था या नहीं या उसे किस कारणों से हॉस्टल नहीं आवंटित किया जा पा रहा था।