यह जैक भारी उपकरणों को पूर्व-निर्धारित कार्य ऊंचाई तक उठाने और नीचे लाने के लिए स्क्रू-थ्रेड का इस्तेमाल करता है। शुआट्स के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक कर रहे दो छात्रों विशेष रंगलानी और सतीश चौरसिया ने सहायक प्रोफेसर डॉ. राहुल डेविस के मार्गदर्शन में बीटेक प्रोजेक्ट में हाइड्रोलिक जैक का आविष्कार किया।
सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय शुआट्स को एक और उपलब्धि हासिल हुई। विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर के निर्देशन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों द्वारा विकसित किए गए एक टॉल-जैकर व्हिल्ड जैक को भारत सरकार ने पेटेंट के रूप में मंजूरी प्रदान की है।
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यह जैक भारी उपकरणों को पूर्व-निर्धारित कार्य ऊंचाई तक उठाने और नीचे लाने के लिए स्क्रू-थ्रेड का इस्तेमाल करता है। शुआट्स के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक कर रहे दो छात्रों विशेष रंगलानी और सतीश चौरसिया ने सहायक प्रोफेसर डॉ. राहुल डेविस के मार्गदर्शन में बीटेक प्रोजेक्ट में हाइड्रोलिक जैक का आविष्कार किया। छात्रों ने बताया कि यह जैक 20 टन तक के जीवीडब्ल्यू (सकल वाहन वजन) वाले दो-एक्सल ट्रकों को उठा सकता है।