इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कई दिग्गजों की राजनीतिक कॅरियर को झटका लगा है। चुनाव में किंगमेकर बन बड़ी पारी खेलने की तैयारी में जुटे छात्र और सियासी नेताओं के प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है। कई तो सिर्फ वोटकटवा साबित हुए। मुख्य लड़ाई में वे कहीं नहीं दिखे। पूरी ताकत झोंकने वाले कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई काफी पीछे छूट गया तो अखिलेश यादव के सूरमाओं को खुद उनकी गलतियों ने रोक दिया। रही-सही उम्मीद एबीवीपी रूपी डायनामाइट के विस्फोट में खाक हो गई।
2013 के छात्रसंघ चुनाव में छात्र-छात्राओं ने राजनीतिक दलों के छात्रसंगठनों के पैनल के प्रत्याशियों को पूरी तरह से नकार दिया था, लेकिन पिछले साल समाजवादी छात्रसभा ने अध्यक्ष और महामंत्री पद पर कब्जा जमाया था तो उपाध्यक्ष आइसा और सांस्कृतिक सचिव का पद एआईडीएसओ के खाते में गया था।
एक अन्य पद पर एबीवीपी का प्रत्याशी विजयी रहा, लेकिन इस बार सारे समीकरण ध्वस्त हो गए। छात्रसभा के प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए छात्र-छात्राओं के बीच पकड़ रखने वाले अभिषेक यादव, अखिलेश गुप्ता के साथ सपा के दिग्गज नेता भी जुटे थे। कई छात्र नेता इसमें जीत के साथ 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट भी सुनिश्चित मान रहे थे, लेकिन करारी हार से उनके मंसूबे पर पानी फिरता दिख रहा है।
हालांकि अध्यक्ष चुनी गईं ऋचा को समर्थन देकर नेता जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन ऋचा ने छात्रसंघ के मंच से घोषणा कर स्पष्ट कर दिया कि किसी भी संगठन से उनका कोई वास्ता नहीं है। सपा तथा छात्रसभा के नेताओं को भी इसकी आशंका थी। यही कारण रहा कि शपथ ग्रहण समारोह से समाजवादी नेताओं ने दूरी बनाए रखी। हर बार की तरह इस बार भी एनएसयूआई के केंद्रीय नेताओं ने चुनाव के दौरान यहां डेरा डाल रखा था। छात्रसंघ के सहारे राजनीति में कॅरियर संवारने में कोशिश में लगे कांग्रेस के अभिषेक शुक्ला, विवेकानंद पाठक आदि को तगड़ा झटका लगा।
इसके विपरीत इस चुनाव ने कई छात्र नेताओं को नई जमीन भी मिली है। एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत से कई छात्र नेताओं के कॅरियर को आधार मिला है तो सिद्धार्थ सिंह गोलू की जीत को अभिषेक सिंह माइकल, अच्युतानंद शुक्ला, चंदन सिंह की नई पारी के रूप में भी देखा जा रहा है। गोलू ने शपथ ग्रहण समारोह में मंच से इन नेताओं के पक्ष में नारा लगाकर इसका संकेत भी दिया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद की लड़ाई में रजनीश सिंह ऋषू को हार जरूर मिली है लेकिन उसके संघर्षों की हर तरफ सराहना हो रही है। ऋषू अध्यक्ष पद पर निर्वाचित ऋचा से मात्र 11 वोट से पीछे रह गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मतदान से एक दिन पहले रजनीश का पर्चा खारिज कर दिया था और फिर भूल सुधार की थी। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन से अंतिम समय में हुई इस भूल से रजनीश को काफी नुकसान हुआ। इसके बावजूद वह 2242 वोट पाने में सफल रहे। यह किसी जीत से कम नहीं है।