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यूपी बोर्ड में भारी गोलमालः छात्रों ने जेंडर कॉलम में ‘एफ’ भरा तो मिल गया स्वकेंद्र

Thu, 13 Jun 2019 02:10 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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यूपी बोर्ड रिजल्ट 2019
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यूपी बोर्ड में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। परीक्षा फार्म भरते समय नकलमाफिया ने छात्रों से जेंडर कॉलम में एम (मेल) की जगह एफ (फीमेल) भरवा दिया और उनको स्वकेंद्र व्यवस्था का लाभ दिला दिया। क्योंकि बोर्ड की ओर से छात्राओं के लिए ही स्वकेंद्र की व्यवस्था है, लिहाजा फार्म में सिर्फ एफ देखकर बोर्ड अफसरों ने भी छात्रों को स्वकेंद्र आवंटित कर दिए। स्वकेंद्र मिलने के बाद हजारों छात्रों ने जमकर नकल की और परीक्षा भी पास कर ली। अब परिणाम आने के बाद छात्र और उनके अभिभावक जेंडर में संशोधन के लिए बोर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इन दिनों बोर्ड के ग्रीवांस सेल के पास ऐसी शिकायतों की भरमार है। 
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शिकायतों पर गौर करें तो इस तरह के सबसे अधिक मामले वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय से जुड़े स्कूलों में सामने आए हैं। पता चला है कि स्वकेंद्र के लिए पूरे विद्यालय के छात्रों ने फार्म में ‘मेल’ की जगह ‘फीमेल’ भर दिया। परीक्षा से पहले इस गलती को पकड़ने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य और जिला विद्यालय निरीक्षक की होती है। लेकिन, दोनों ही स्तरों पर आंखें मूंदकर रखी गईं। छात्राओं की स्वकेंद्र व्यवस्था का लाभ उठाकर हजारों छात्रों ने परीक्षा पास भी कर ली है। अब परिणाम आने के बाद ऐसे छात्र प्रमाणपत्र में ‘एफ’ की जगह ‘एम’ कराने की मांग कर रहे हैं। बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो नकलमाफिया, परीक्षार्थी और केंद्र व्यवस्थापकों के गठजोड़ ने छात्र को छात्रा दिखाकर स्वकेंद्र का लाभ लिया है। लेकिन, अब यह भी सवाल उठता है कि यूपी बोर्ड के अफसर क्या कर रहे थे। 

इस मामले में संलिप्त कुछ परीक्षार्थियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उनको नकलमाफिया ने आश्वस्त किया था कि परीक्षा के बाद उनके प्रमाणपत्र में संशोधन करा दिया जाएगा। लेकिन, अब नकलमाफिया पलटी मार गए और इस फर्जीवाड़े का शिकार छात्र अगली कक्षा में प्रवेश पाने के लिए परिणाम में संशोधन की आस लेकर बोर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। 
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ऐसे किसी मामले की शिकायत मेरे पास नहीं पहुंची है। यदि परीक्षा फार्म में एम की जगह एफ भरकर छात्रों ने स्वकेंद्र का लाभ लिया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। आवेदन में गड़बड़ी के बाद भी परीक्षा के समय प्रवेशपत्र में इस प्रकार की गड़बड़ी दूर करने के लिए बोर्ड की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षक को अधिकार दिया जाता है, फिर परीक्षार्थी एवं केंद्र व्यवस्थापकों ने गलती क्यों नहीं दूर करवाई। - नीना श्रीवास्तव, सचिव, यूपी बोर्ड, प्रयागराज
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