इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में छात्रसंघ की बहाली पर 27 फरवरी को मुहर लग सकती है। इविवि प्रशासन ने इसी दिन एकेडमिक कौंसिल की बैठक बुला ली है। इस बैठक में इविवि की प्रवेश परीक्षा को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बदलावों पर भी अंतिम मुहर लगाई जा सकती है।
कार्यभार ग्रहण करने के बाद कुलपति प्रो. आरआर तिवारी से छात्रों से मुलाकात कर छात्रसंघ बहाली की मांग की थी। कुलपति ने अपने बयान में कहा था कि अगर शिक्षक संघ और कर्मचारी संघ हो सकता है तो छात्रसंघ क्यों नहीं। कुलपति के बयान से संकेत मिले गए थे कि इविवि में छात्रसंघ की बहाली जल्द हो सकती है।
फिलहाल इविवि प्रशासन ने 27 फरवरी को एकेडमिक कौंसिल की बैठक बुला ली है। इससे पूर्व एकेडमिक कौंसिल और एग्जीक्यूटिव कौंसिल में ही छात्रसंघ को समाप्त कर उसकी जगह छात्र परिषद के गठन का निर्णय लिया गया था।
पिछले साल पांच जून को कार्य परिषद में हुए इस निर्णय के बाद इविवि प्रशासन ने छात्र परिषद का चुनाव भी कराया लेकिन भारी विरोध के बीच इविवि में छात्र परिषद का गठन नहीं हो सका। इविवि के किसी भी विद्यार्थी ने इस चुनाव में भागीदारी नहीं की थी।
अब 27 फरवरी को होने वाली एकेडमिक कौंसिल की बैठक में छात्रसंघ बहाली पर मुहर लग सकती है। मई में इविवि की प्रवेश परीक्षा भी होनी है। कौंसिल की बैठक में परीक्षा को लेकर प्रस्तावित कुछ बदलावों पर मुहर लग सकती है।
मंत्रालय से कार्य परिषद की बैठक कराने के निर्देश
इविवि में नए कुलपति की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है लेकिन अब तक सर्च कमेटी के सदस्यों के नाम तय नहीं हो सके हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि कार्य परिषद की बैठक तत्काल बुलाकर सर्च कमेटी के सदस्यों के नाम तय किए जाएंगे और मंत्रालय को इससे अवगत कराया जाए। चर्चा है कि एकेडमिक कौंसिल की बैठक के बाद जल्द ही कार्य परिषद की बैठक बुलाकर सर्च कमेटी के सदस्यों के नाम तय कर लिए जाएंगे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में क्रेट में चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। पीएचडी प्रवेश में जिन्होंने धांधली की शिकायत की, उनके मामले में इविवि प्रशासन अब तक कोई निर्णय नहीं ले सका और न ही उन अभ्यर्थियों के बारे में कोई फैसला हुआ, जिनका चयन पीएचडी प्रवेश के लिए हो चुका है। मामला अब हाईकोर्ट में है।
क्रेट में धांधली की शिकायत पर कुलपति प्रो. आरआर तिवारी ने 31 जनवरी को पीएचडी प्रवेश निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया था। साथ ही निर्देश दिए थे कि पंद्रह दिनों के भीतर इंटरव्यू दोबारा कराकर चयनितों की नई सूची तैयार कर ली जाए। कुलपति के आदेश से पूर्व 48 अभ्यर्थियों को पीएचडी प्रवेश के लिए चयन हो चुका था और इनमें से ज्यादातर छात्राएं हैं। चयनित छात्र-छात्राओं कुलपति के आदेश का विरोध कर रहे हैं और मांग कर रहे है कि कुलपति अपना आदेश रद्द करते हुए पूर्व में चयनित अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराएं। इस पूरे विवाद में नुकसान केवल छात्र-छात्राओं को हो रहा है। वाणिज्य संकाय के डीन प्रो. असीम मुखर्जी का कहना है कि मामला न्यायालय में है। ऐसे में न्यायालय का आदेश आने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की प्रवेश मई में प्रस्तावित है। परीक्षा का आयोजन एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा, सो एजेंसी के चयन के लिए इविवि प्रशासन ने टेंडर निकाल दिया है।
इविवि प्रशासन की ओर से 15 फरवरी को जारी टेंडर में एजेंसियों से 21 दिनों के भीतर आवेदन मांगे गए हैं। इसके बाद टेंडर फाइनल किया जाएगा। इविवि की प्रवेश समिति स्नातक, परास्नातक एवं संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा की तिथि भी प्रस्तावित कर चुकी है लेकिन इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है। एजेंसी का चयन होने के बाद उसकी सहमति से परीक्षा की प्रस्तावित तिथि पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। परीक्षा समिति का लक्ष्य है कि जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।