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छात्रसंघ चुनाव में अब पैनल के लिए जोड़तोड़

Sun, 18 Sep 2016 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कई राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेताओं की साख भी दांव पर लग गई है। चुनाव जीतने के साथ नेताओं के सामने पहली चुनौती पार्टी के छात्र संगठन के पैनल से चहेते छात्र नेता को टिकट दिलाने की है। तीन प्रमुख छात्र संगठन से चुनाव लड़ने के लिए सबसे अधिक दावेदार हैं। विधानसभा चुनाव सामने है। इसकी वजह से नेताओं के लिए छात्रसंघ चुनाव का सियासी महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में इस इलेक्शन में विधानसभा चुनाव का प्रभाव दिखना तय माना जा रहा है।
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विश्वविद्यालय छात्रसंघ के लिए 21 सितंबर से नामांकन पत्रों की बिक्री शुरू होगी लेकिन अभी तक एक-दो संगठनों ने पैनल की घोषणा की है। एबीवीपी, समाजवादी छात्रसभा, एनएसयूआई, आइसा आदि संगठनों ने अभी तक पैनल घोषित नहीं किया है। इस देरी के पीछे छात्र नेताआें के बीच खींचातन तथा पार्टी नेताओं का हस्तक्षेप है। समाजवादी छात्रसभा के पैनल से चुनाव लड़ने के लिए बात आजम खां तक पहुंच गई है। पैनल चयन में सांसद धर्मेंद्र सिंह यादव, विधायक संग्राम सिंह यादव का हस्तक्षेप तय है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी के पैनल से चुनाव लड़ने के लिए आवेदकों की लंबी लिस्ट है। दावेदार भाजपा के साथ आरएसएस के नेताओं का आर्शीवाद प्राप्त करने में भी लगे हैं। माना जा रहा है कि छात्रसंघ चुनाव में भी आरएसएस के नेताओं का आशीर्वाद जरूरी होगा। संगठन से अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे दो छात्र नेताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई से समीकरण और गड़बड़ा गया है।
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चुनाव की घोषणा के साथ एनएसयूआई के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा भी यहां शुरू होने जा रहा है। संगठन के शीर्ष नेता ही पैनल का निर्धारण करेंगे। विगत चुनावों में मजबूत दावेदारी पेश करने वाला प्रतियोगी छात्र मोर्चा इस बार अपना दल छात्र मंच के साथ चुनाव में है। छात्रों के बीच मोर्चे की पकड़ को देखते हुए छात्र नेताआें की भी नजर मोर्चे पर है। जोड़तोड़ की स्थिति वामपंथी विचारधारा के छात्र संगठनों में भी है। आइसा के पैनल के लिए प्रत्याशियों की खोज अभी पूरी नहीं हो पाई है। कई अन्य छात्र संगठनों ने भी पैनल उतारने की घोषणा की है।
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