प्रयागराज। छात्र परिषद यानी ‘क्लास मॉनीटर’, जो शिक्षक के कहे अनुसार चले और छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें चुप रहने की सलाह दे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की बहाली के लिए आंदोलन कर रहे छात्रनेताओं का यही मानना है। रविवार को ‘अमर उजाला’ कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में जुटे विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे लोकतंत्र और राजनीति की नर्सरी को नष्ट नहीं होने देंगे। इतिहास दोहराया जाएगा और छात्रसंघ की बहाली के लिए सभी छात्र संगठन फिर से एक मंच पर आकर मजबूती से लड़ाई लड़ेंगे। छात्रनेताओं ने कहा कि लड़ाई विचारों की नहीं, छात्र हितों की है। ऐसे में कौन छात्र किस संगठन का है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्व इस बात का है कि सभी अलग-अलग संगठनों के छात्र एकजुट होकर इस लड़ाई को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाते हैं। छात्रनेताओं ने सवाल उठाया कि उस छात्रसंघ को अपराधियों का संगठन कैसे कहा जा सकता है, जिससे 25 हजार छात्र सीधे तौर पर जुड़े हैं। लेकिन, इविवि प्रशासन यही साबित करने में जुटा है और वह भूल गया है कि ये 25 हजार छात्र उसी के संस्थान का हिस्सा हैं।
पूंजीपतियों का भी दबाव
छात्रनेताओं ने कहा कि छात्रसंघ समाप्त करने पीछे पूंजीपतियों का भी दबाव है। निजी विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं और सरकार उनपर करोड़ों रुपये लुटा रही है, जबकि सरकारी शिक्षण संस्थान बर्बाद हो रहे हैं। छात्रसंघ इसके खिलाफ लगातार आवाज उठा रहा है। ऐसे में सीधे छात्रसंघ को ही समाप्त किए जाने की साजिश शुरू हो गई है।
छात्र नहीं, अब शिक्षक लड़ेंगे चुनाव
इविवि के छात्रसंघ चुनाव में सर्वाधिक भागीदारी नव प्रवेशितों की होती है। छात्रनेताओं का मानना है कि छात्र परिषद लागू हुआ तो छात्र नहीं, बल्कि शिक्षक चुनाव लड़ेंगे। छात्रसंघ के साथ प्रत्यक्ष मतदान समाप्त हो जाने पर शिक्षक जिसके लिए कहेंगे, नव प्रवेशित छात्र उसे ही अपना कक्षा प्रतिनिधि चुन लेंगे और शिक्षक के करीबी कक्षा प्रतिनिधि जिसे भी छात्र परिषद का पदाधिकारी चुनेंगे, वह छात्रों की समस्या पर कितना ध्यान देगा, अव्यवस्था के मुद्दे पर इविवि प्रशासन के खिलाफ कितनी मजबूती से लड़ सकेगा, यह बताने की जरूरत नहीं है।
बड़ी बात कह गए छोटे कद के मिथिलेश
श्री बजरंग पीजी कॉलेज, बलिया के छात्रसंघ महामंत्री मिथिलेश यादव का कद भले ही तीन फीट तीन इंच हो, लेकिन वह बात बड़ी कह गए। 20 वर्षीय मिथिलेश बीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं और यहां छात्रसंघ की बहाली के लिए चल रहे आंदोलन को अपना समर्थन देने आए हैं। संवाद में शामिल हुए मिथिलेश ने कहा कि इविवि का छात्रसंघ राजनीति की नर्सरी है। अगर इसे ही समाप्त कर दिया जाएगा तो किसानों और मजदूरों के बच्चे विधायक एवं सांसद नहीं बन सकेंगे। सरकार हो या विश्वविद्यालय प्रशासन, उन्हें इस ऐतिहासिक छात्रसंघ को समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं। इस छात्रसंघ ने देश को कई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गवर्नर और राष्ट्रपति दिए हैं। इनमें से कई किसान और मजदूर परिवार से आए थे।
बोले छात्रनेता-
इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं। छात्र परिषद के गठन का निर्णय एकेडमिक कौंसिल और कार्य परिषद ने लिया, जिसमें छात्रों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। एकेडमिक कौँसिल और कार्य परिषद कुलपति की मुट्ठी में है। कुलपति ने पूरी तरह से अपनी मनमानी की। अब उन्हें और उनके विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों का विरोध झेलना होगा। -रोहित मिश्र, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, इविवि
वर्ष 2005 में छात्रसंघ चुनाव के दौरान छात्रनेता की हत्या हो गई और इसके बाद छह सात साल तक चुनाव नहीं हुआ। कांग्रेसी विचारधारा का होने के बाद भी मैं छात्रसंघ बहाली के लिए यूपीए सरकार के खिलाफ लड़ता रहा और अंत में सफलता मिली। छात्रसंघ बहाल हुआ। साथियों से अनुरोध है कि सरकार का मुंह न देखें और हर स्तर पर अपनी लड़ाई लड़ें।- विवेकानंद पाठक, यूथ कांग्रेस एवं वरिष्ठ छात्र नेता
इविवि में हर तरफ फोर्स और बंदूकधारी नजर आते हैं। कुलपति के पास छात्रों से मिलने के लिए वक्त नहीं है। छात्रसंघ को समाप्त किया जा रहा है और छात्र परिषद इविवि प्रशासन की कठपुतली बनकर रहेगा। ऐसे में छात्र अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएंगे। वैसे भी इविवि प्रशासन के सामने समस्या उठाने का मतलब छात्र का निलंबन है। -उदय प्रकाश यादव, अध्यक्ष इविवि छात्रसंघ-
एक तरफ सरकार पंचायत चुनाव में भ्रष्टाचार और अराजकता पर लगाम लगाने के लिए प्रत्यक्ष मतदान कराने जा रही है तो दूसरी ओर इविवि प्रशासन इस व्यवस्था को समाप्त कर रहा है। प्रत्यक्ष मतदान से छात्रसंघ में सीधे चुनकर आने वाले पदाधिकारियों की छात्रों के प्रति जवाब देही बनती है, लेकिन छात्र परिषद में ऐसा नहीं होगा और स्थिति बिगड़ेगी। -शिवम सिंह, महामंत्री इविवि छात्रसंघ
यौन उत्पीड़न, भ्रष्टाचार के तमाम मामलों में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षक लिप्त पाए गए हैं। कुलपति भी लगातार विवादों में घिरे रहे। जहां तक छात्रसंघ की बात है तो पिछले कुछ वर्षों से चुनाव के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुआ। हॉस्टल में कब्जे भी अधीक्षक या अधीक्षिका ही करवाते हैं और दोष छात्र-छात्राओं पर मढ़ दिया जाता है। -नेहा यादव, समाजवादी छात्रसभा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पहले भी आंदोलन होते रहे हैं। इविवि प्रशासन भी इसे सकारात्मक तौर पर लेता था और अपेक्षित सुधार भी होता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हालात बहुत तेजी से बिगड़े हैं। अब तो ज्ञापन देने या अपनी बात कहने पर भी निलंबन, निष्कासन की कार्रवाई हो जाती है। छात्रसंघ समाप्त होने से स्थिति और बिगड़ेगी।- अखिलेश गुप्ता, अध्यक्ष समाजवादी छात्रसभा
इविवि में अब तो सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी मुश्किल से अनुमति मिलती है। बैठक या सभा भी करनी हो तो इविवि प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति भी आसानी से नहीं मिलती है। ऐसे में इविवि प्रशासन छात्रसंघ को कैसे बर्दाश्त कर सकता है, जो इविवि प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने वाला एकमात्र संगठन है।- अमित, दिशा छात्र संगठन
पिछले दिनों हॉस्टलों में हत्याओं की जो घटनाएं हुई हैं, उससे छात्रसंघ का कोई लेनादेना नहीं है। हत्याएं आपसी रंजिश और ठेकेदारी को लेकर हुईं। यह बात इविवि प्रशासन भी जानता है लेकिन वह छात्रसंघ समाप्त करने पर तुला है और इसी वजह से ऐसी घटनाओं को तोड़ मरोड़ कर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। -अनुपम त्रिपाठी, महानगर मंत्री एबीवीपी
छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद लागू करने की घोषणा हुई तो विरोध में कॉलेज प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। वहां कहा गया कि इविवि प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखें, क्योंकि निर्णय इविवि प्रशासन है। इस पर कुलपति से मिलने के लिए समय मांगा गया, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुए। जो छात्रनेताओं से मिलने को तैयार नहीं, वह छात्रों से क्या मिलेंगे। -मो. राशिद, कार्यवाहक छात्रसंघ अध्यक्ष सीएमपी डिग्री कॉलेज
अपने कॉलेज में बतौर छात्रनेता कई वर्षों तक आंदोलन करता रहा, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद इविवि में शोध में प्रवेश मिल गया। एक मुद्दे पर बात करने के लिए इविवि के चीफ प्रॉक्टर के पास पहुंचा। सिर्फ दो मिनट की बात हुई और इसके बाद निलंबन का नोटिस थमा दिया गया। ऐसे में बताने की जरूरत नहीं कि आम छात्रों के साथ क्या होता होगा। -विवेक कुमार तिवारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एडीसी
छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल लागू करने का निर्णय लेकर इविवि प्रशासन ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी मनमानी से बाज नहीं आएगा। कुलपति और उनके करीबी कुछ शिक्षक अपनी नाकामियों एवं भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है, वरना इविवि प्रशासन की यह मानमानी विश्वविद्यालय को गर्त में ले जाएगी। -राघवेंद्र यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष समाजवादी युवजन सभा
मैं लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़कर इलाहाबाद विश्वविद्यालय आई हूं। तुलनात्मक रूप से यहां के छात्र-छात्राएं सांस्कृतिक, राजनैतिक गतिविधियों में लखनऊ विश्वविद्यालय के मुकाबले काफी अधिक सक्रिय हैं। यहां के छात्रसंघ की अपनी गरिमा और इतिहास रहा है। इविवि प्रशासन इसे ऐसे ही नष्ट नहीं कर सकता और न ही उसे कोई अधिकार है।- शिवा, दिशा छात्र संगठन
इन छात्रों ने भी रखी बात
संवाद कार्यक्रम में शामिल एबीवीपी के अमरेंद्र सिंह, पुष्कर मौर्या, सत्यम शर्मा, सूरज तिवारी, सीएमपी के छात्रनेता अनुभव उपाध्याय, एनएसयूआई के अब्दुल आलम, अक्षय, बीए के छात्र कार्तिकेय त्रिपाठी, अभिषेक प्रताप सिंह, प्रकाश पांडेय ने भी अपनी बात रखी। सभी ने छात्र परिषद के गठन पर विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि छात्रसंघ की बहाली के लिए जारी आंदोलन में विश्वविद्यालय का प्रत्येक छात्र शामिल हैं और किसी भी सूरत में छात्रसंघ की बहाली कराके रहेंगे।