शहर में स्ट्रीट डॉग्स लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। सड़कों से गुजरते वाहनों के पीछे-पीछे दौड़ना और दुपहिया वाहन सवारों को इन डॉग्स द्वारा काट लेना आम बात है। पटरी पार पुराने शहर की ज्यादातर सड़कों के साथ खासकर स्टेनली रोड पर इन आवारा कुत्तों का जबरदस्त आतंक है। नगर निगम ने इन कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान भी चलाता है लेकिन इनकी संख्या लगातार बढ़ने से समस्या गंभीर होती जा रही है। ऐसे में नगर निगम ने कुत्तों की नसंबदी कराने की तैयारी की है। इसके लिए सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर काम शुरू कराने की योजना बनाई गई है।
रात में सड़कों पर सन्नाटा पसरने के बाद डॉग्स एकदम से आक्रामक हो जाते हैं। इस बीच सड़कों से चारपहिया या दुपहिया वाहन गुजरने पर यह डॉग्स काफी दूर तक उसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं। दुपहिया वाहन चालकों को लिए ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक होती है। वाहनों का पीछा करते हुए यह डॉग्स उस पर सवार या पीछे बैठे व्यक्ति पर हमला कर देते हैं। कई बार इसकी वजह से दुर्घटनाएं भी होती हैं। अक्सर दिन में यह डॉग्स कहीं दुबक जाते हैं, जिसकी वजह से निगम के दस्ते को खास सफलता भी नहीं मिलती। निगम के पशुधन अधिकारी डॉ.धीरज गोयल ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए कई संस्थाओं से संपर्क किया गया है। इसके लिए टेंडर भी निकाला गया है। जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर नसबंदी के लिए स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने का अभियान शुरू होगा।
पटरी पार पुराने शहर के जानसेनगंज, घंटाघर चौराहा, बहादुरगंज, अतरसुइया गली, मीरापुर, मुट्ठीगंज, अटाला, करेली, अकबरपुर, खुल्दाबाद जैसे इलाकों में यह समस्या बेहद गंभीर है। स्टेनली रोड पर महाराणा प्रताप चौराहा से ट्रैफिक चौराहा के बीच, बेली हास्टल से म्योराबाद चौराहा के बीच रात में यह डॉग्स गाड़ियां, साइकिल सवार का पीछा कर काटने का प्रयास करते हैं।
स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी केंद्र सरकार की एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) योजन के तहत कराई जाएगी। इस योजना में आने वाला पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। डॉ.गोयल ने बताया कि इस काम के लिए संस्था का चयन होने के बाद उसके और निगम के बीच एमओयू होगा। स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने की शुरूआत मांस-मछली की दुकानों और रेस्टोरेंट्स के आसपास से होगी। इसके बाद घनी आबादी वाले इलाकों में अभियान चलाकर डॉग्स पकड़े जाएंगे। नसबंदी के बाद इन डॉग्स को जहां से पकड़ा गया होगा, वहां छोड़ा भी जाएगा।