सोरांव के भोपतपुर गांव में भूख से हुई राम किशोर की मौत के बाद पीड़ित परिवार को आखिरकार उसका हक मिल सका। तहसील प्रशासन ने मंगलवार को घर के एक हिस्से पर हुए अवैध कब्जे को भी हटवा दिया। परिवार ने तंगहाली में घर के खिड़की-दरवाजे तक बेच दिए थे। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद घर में खिड़की-दरवाजे भी लग गए। वहीं, मौके पर पहुंचे कांग्रेसियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले में उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की।
राम किशोर की मौत के बाद प्रशासन ने उसके घर में राशन रखवा दिया है। घर में अब राशन का संकट नहीं है, लेकिन राम किशोर की पत्नी बरन देवी और पुत्र एवं पुत्री का कहना है कि अब इनका सबका क्या फायदा। राम किशोर के जिंदा रहते प्रशासन मदद को आगे नहीं आया। अगर वक्त रहते मदद मिल गई होती तो राम की भूख से मौत न होती। फिलहाल प्रशासन ने राम के एक घर पर हुए अवैध कब्जे को भी हटवा दिया है।
उधर, कांग्रेस के जिला महासचिव श्याम सुंदर शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को सोरांव में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। कांग्रेसियों ने पीड़ित परिवार के सदस्यों से बातचीत के आधार पर कहा कि प्रशासन ने भूख से मौत का मामला दबाने के लिए गलत जांच रिपोर्ट दी है। कार्यकर्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, कांग्रेस नेता प्रशांत सोनकर ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा और राम किशोर के पुत्र को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की है।