पेंशनर्स के आधार कार्ड में भी कई तरह की गड़बड़ी सामने आई है। आधार कार्ड में जालसाजों द्वारा सेंध लगाने से कई लोग फर्जी पेंशनर्स बन बैठे। नतीजा यह है कि पेंशनर्स के जीवित होने की ऑनलाइन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है और पेंशनर्स को फिर से कोषागार में उपस्थित होकर खुद को जीवित होने का प्रमाण पत्र देना पड़ रहा है।
पेंशनर्स को राहत देने के उद्देश्य से उनके जीवित होने का प्रमाण पत्र देने की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई। इसके तहत पेंशनर घर बैठे अपने एकाउंट में जाकर खुद के जीवित होने का प्रमाण पत्र दे सकते थे। इस व्यवस्था में उनका पूरा विवरण आधार कार्ड से जुड़ा है लेकिन अब कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। बड़ी संख्या में फर्जी पेंशनर भी सामने आ गए हैं। हालांकि, इस गड़बड़ी के पीछे बताया जा रहा है कि परेशानियों से बचने के लिए पेंशनर्स ने पासवर्ड दूसरों को बता दिए, जिसका फायदा जालसाजों ने उठाया। इसके अलावा आधार कार्ड के डिटेल से पेंशनर्स की पहचान न मिलने की बड़ी संख्या में शिकायतें आईं, जिनमें बताया गया कि पेंशनर्स की अंगुलियों के निशान ही मिट गए हैं। इसकी वजह से साफ्टवेयर उनकी पहचान नहीं कर पाया। इन वजहों से पेंशनर्स की पहचान तथा जीवित होने के प्रमाण पत्र दिए जाने की ऑनलाइन व्यवस्था ही फिलहाल रोक दी गई है। मुख्य कोषाधिकारी राकेश सिंह का कहना है कि शासन के निर्देश पर ऑनलाइन प्रक्रिया रोकी गई है। इसके अलावा कुछ भी बताने से उन्होंने मना कर दिया।
दूसरों की अंगुलियों से बना दिए आधार कार्ड
बड़ी संख्या में पेंशनर्स के आधार कार्ड अब मैच नहीं कर रहे हैं। जांच में नया खेल सामने आया है। उम्रदराज पेंशनर्स का आधार कार्ड बनवाना कठिन रहा। साफ्टवेयर उनकी अंगुलियों के निशान को पढ़ ही नहीं पा रहा था। इसके विपरीत पेंशन के लिए आधार कार्ड से खाता को लिंक करने का दबाव था। ऐसे में ऑपरेटरों ने दूसरों की अंगुलियों को लगाकर आधार कार्ड बना दिए। अब उनका मिलान नहीं होने की वजह से नई समस्या खड़ी हो गई।