इलाहाबाद। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती बंद किए जाने के प्रस्ताव के साथ ही जूनियर टीईटी पास करने वाले बीएड बेरोजगारों की रही-सही उम्मीद भी खत्म हो गई है। सरकार के इस विरोधाभासी निर्णय के कारण बीएड बेरोजगारों ने जूनियर टीईटी कराए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। बेरोजगारों का कहना है कि जब सरकार नौकरी नहीं देना चाहती है तो हर वर्ष टीईटी कराने का क्या मतलब है। बीएड बेरोजगार आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं।
एक ओर तो उच्च प्राथमिक विद्यालयों स्कूलों में सीधी भर्ती बंद करने की तैयारी और दूसरी ओर लगातार प्राथमिक स्तर की टीईटी के साथ जूनियर टीईटी कराए जा रही है। इन दिनों सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। इस आवेदन में सरकार ने जूनियर टीईटी के लिए भी आवेदन मांगा है। जूनियर टीईटी पास अभ्यर्थियों ने सरकार को रक्तपत्र लिखकर उनके साथ न्याय करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि पहले सवा पांच लाख टीईटी पास अभ्यर्थियों को रोजगार की व्यवस्था की जाए, उसके बाद सरकार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी अथवा प्रमोशन से भर्ती पर निर्णय किया जाए।
अभी तक 50 फीसदी पदों पर होती रही है सीधी भर्ती
प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य योग्यता है। प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती मेरिट के आधार पर होती है जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अभी तक 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से तथा 50 फीसदी पद को प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रमोशन देकर भरा जाता रहा है। अब प्रदेश सरकार की ओर से उच्च प्राथमिक विद्यालयों सीधी भर्ती बंद करने का प्रस्ताव तैयार करने के बाद जूनियर टीईटी पास अभ्यर्थी अधर में फंस गए हैं।