कई आला अफसरों ने उस दिन शाइस्ता से पूछताछ भी की थी। इस मामले में शाइस्ता परवीन को उमेश की पत्नी जया पाल की तहरीर पर 25 फरवरी की सुबह नामजद किया गया। नामजद होने के बाद तीन दिन तक शाइस्ता परवीन उसी घर में रह कर अपने पति और बेटों को बेगुनाह बताती रही। इस दौरान उसे क्यों पकड़ा नहीं गया। किसकी मेहरबानी से उसे छोड़ दिया गया? यह सवाल हर किसी के जेहन में कौंध रहा है।
इतना ही नहीं शाइस्ता अपने वकील की मदद से सीजेएम कोर्ट में पुलिस हिरासत में लिए गए अपने नाबालिग बेटों को प्रस्तुत करने को लेकर अर्जी भी डालती रही है। लेकिन, एसटीएफ उस तक नहीं पहुंच सकी। अलबत्ता शाइस्ता की तलाश पैसा, परिश्रम और वक्त बर्बाद करने के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। अहम बात तो यह है फरारी के समय जब लेडी डॉन का पोस्टर जारी करने की बात की जा रही है, तब पुलिस के पास उसकी एक अदद फोटो तक नहीं है। जबकि, उमेश पाल हत्याकांड को लेकर साबरमती और बरेली की जेलों के भीतर से बाहर तक के राज जानने से लेकर शूटरों को मोबाइल और सिम मुहैया कराने तक का शाइस्ता पर आरोप है।