इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के अकबरपुर बहरामपुर की पार्षद रितु चौधरी के चुनाव को रद्द करने वाले अपर जिला जज की अदालत के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विपक्षियों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायामूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने रितु चौधरी की ओर से दाखिल अपील पर दिया है। याची रितु चौधरी नगर निगम के वार्ड-35 अकबरपुर बहरामपुर से निर्दलीय पार्षद चुनी गई थीं। निकटतम प्रतिद्वंद्वी पिंटू सिंह ने अपर जिला जज की अदालत में रितु के निर्वाचन को चुनौती दी थी। आरोप लगाया था कि रितु के नामांकन पत्र में अधूरी जानकारी दी गई थी। चल-अचल संपत्ति का ब्योरा छुपाया था। चुनाव अधिकारियों से मिलीभगत कर नामांकन पत्र में प्रस्तावक के नाम बदले गए थे।
पिंटू सिंह की चुनाव याचिका स्वीकार कर अपर जिला की अदालत ने रितु के निर्वाचन को रद्द कर दिया था। साथ ही चुनाव अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई करने का आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ रितु ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याची की अधिवक्ता ने दलील दी कि अधूरे नामांकन पत्र को स्वीकार किए जाने के आधार पर चुनाव रद्द करने व अन्य उम्मीदवारों का निर्वाचित घोषित करने का फैसला अवैधानिक है। नामांकन पत्र को लेकर उठाई गईं आपत्तियां ठोस साक्ष्यों से समर्थित नहीं हैं। चुनाव न्यायाधिकरण का फैसला दस्तावेजी साक्ष्यों के विपरीत कल्पनाओं पर आधारित है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए अपर जिला जज के फैसले पर अगली तारीख तक रोक लगा दी।
23 वोट से जीती थीं रितु
नगर निगम का चुनाव 11 मई 2023 को हुआ था। परिणाम 13 मई को आया था। वार्ड 35 से जीतीं रितु चौधरी को 1496 वोट मिले थे। वह 23 वोट से जीती थीं। दूसरे स्थान पर पिंटू रहे थे, उन्हें 1473 वोट मिले थे।