हाईकोर्ट ने सपा के राज्यसभा सदस्य रामजी लाल सुमन की ओर से सुरक्षा को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य व केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। इसका प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय देते हुए 28 मई की तिथि तय की है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है।
सपा नेता ने राज्यसभा में राणा सांगा पर विवादित बयान दिया था। इसे लेकर करणी सेना सहित अन्य कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। आगरा स्थित उनके आवास पर सैकड़ों लोगों ने कथित रूप से तोड़फोड़ की थी। ऐसे में रामजी लाल सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।
न्यायालय में बुधवार को याची के अधिवक्ता इमरान उल्लाह व विनीत विक्रम ने दलील दी कि राज्य सभा सदस्य पर लगातार हमले हो रहे हैं। उनकी जीभ काटने के लिए एक करोड़ रुपये की सुपारी दी गई है। अलग-अलग संगठन धमकियां दे रहे हैं।
इसके बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में राज्य सभा सदस्य की हत्या की आशंका है। ऐसा प्रतीत होता है कि धमकी देने वाले संगठनों को राज्य सरकार का संरक्षण प्राप्त है। यह भी दलील दी कि 100 से अधिक लोग सांसद के घर तक जेसीबी लेकर पहुंच जा रहे हैं और तोड़फोड़ कर रहे हैं।
आरोपियों पर मुकदमा दर्ज है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। कोर्ट से मांग की गई कि किसी केंद्रीय सुरक्षा बल की सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही दर्ज एफआईआर की विवेचना ठीक से हो। धमकी देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, राज्य के वकील ने दलील दी कि सांसद को दोहरी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस पर कोर्ट ने राज्य व केंद्र से जवाब तलब किया है।
जो बयान रिकॉर्ड पर ही नहीं उसे क्यों प्रसारित किया जा रहा
प्रयागराज। अधिवक्ता इमरान उल्लाह ने कहा कि राज्यसभा में रामजी लाल सुमन ने जो बयान दिया था, उसे रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। इसके बाद भी मीडिया उसे प्रसारित कर रही है, जबकि जो तथ्य रिकॉर्ड पर हैं ही नहीं, उसे प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए। प्रसारित वीडियो की वजह से ही सांसद को कई संगठन धमकी दे रहे हैं। उनके घर पर हमला भी किया गया। ब्यूरो