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आत्मा-शरीर के बीच जटिल संबंध का मंचन

Tue, 30 Jan 2018 11:31 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
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पांच दिवसीय राष्ट्रीय रंगोत्सव की चौथी शाम मंगलवार को बोधायन के नाटक भगवद्ज्जुकीयम का मंचन हुआ। जाने-माने नाट्य निर्देशक सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने इसका निर्देशन किया है। प्राचीन प्रहसनों में से एक और हास्य-व्यंग से परिपूर्ण नाटक भगवद्ज्जुकीयम का हिंदी रूपांतरण भी निर्देशक सूर्य कुमार कुलश्रेष्ठ ने ही किया है। उन्होंने नाटक में शास्त्रीयता को बरकरार रखते हुए, इसमें आधुनिक रंगमंच को बखूबी जोड़ा है। ‘विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान’ की ओर से जगत तारन डिग्री कॉलेज स्थित रवींद्रालय में आयोजित रंगोत्सव के दौरान इस नाटक ने दर्शकों के सामने आत्मा-शरीर के बीच जटिल संबंध को रेखांकित किया।
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सातवीं शताब्दी में भारत वर्ष में धर्म और दर्शन के क्षेत्र में तरह-तरह के भटकाव आ रहे थे। नैतिकता पतनशील थी तथा सांप्रदायिक विद्वेष की भावनाएं प्रबल हो रही थीं। उसी काल में बोधायन ने संस्कृत नाटक भगवद्ज्जुकीयम की रचना की। यह गुरु-शिष्य के बीच मनोरंजक वाद-विवाद से प्रारंभ होता है। गुरु परिव्राजक केवल आत्मा के अस्तित्व को मानते हैं, वहीं शिष्य शांडिल्य सांसारिक सौंदर्य और आवश्यकताओं की पूर्ति को ही जीवन का सार मानता है। मंगलवार को मंचन के दौरान नाटक में इन बातों को बखूबी प्रस्तुत किया गया है। एक प्रसंग में जब शांडिल्य की प्रेमिका वसंतसेना को यमदूत सर्प का रूप धरकर उसे डस लेता है तब शिष्य की पीड़ा दूर करने के लिए गुरु देह त्याग कर अपनी आत्मा को वसंतसेना के शरीर में प्रविष्ट करा देते हैं। इसके बाद वसंतसेना गणिका गुरु के समान व्यवहार करने लगती है।

यमदूत जिसने गलती से वसंतसेना के प्राण हर लिए थे, अपनी भूल सुधारने आता है पर वसंतसेना को जीवित पाकर उसकी आत्मा को गुरु परिव्राजक के मृत शरीर में प्रविष्ट करा देता है। अब गुरु एक गणिका जैसा व्यवहार करने लगते हैं। अंत में यमदूत आत्माओं की अदला-बदली करके सब ठीक कर देता है, पर आत्मा और शरीर को लेकर गुरु-शिष्य की विचार धाराएं हिल चुकी होती हैं।
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नाटक की मुख्य भूमिकाओं में गुरु के रुप में विकेश बाजपेई शांडिल्य-नितीश भारद्वाज, वसंतसेना-शालनी विजय, मधुरिका-प्रकृति चंद्रा, वसंतसेना की मां-संध्या रस्तोगी, रमिलक-संजीव वर्मा, ओझा- देवाशीष मिश्र और यमदूत-अमित सिन्हा रहे। संगीत संचालन अश्वनी ‘मक्खन’ का तथा संगीत रवि नागर ने दिया। नाटक में विशेष सहयोग मृदुला भरद्वाज का रहा। बुधवार को समूहन संस्था आजमगढ़ की ओर से राजकुमार शाह के निर्देश में नाटक विदाई का मंचन शाम सात बजे होगा।
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