सीएचसी के कर्मचारी दरवाजा बंद करके सो गए, इसके चलते प्रसूता को लेकर पहुंचे परिवार वालों को काफी देर तक भटकना पड़ा। प्रभारी चिकित्साधिकारी को फोन करने के बाद अस्पताल का दरवाजा खुला तो प्रसव में लापरवाही हुई और बरेली ले जाते समय प्रसूता की मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि प्रसूता को पीएचसी पर ले गए तो वहां उनसे तीन हजार रुपये रिश्वत मांगी गई।
गांव चंदपुरा निवासी अतीक अहमद ने बताया कि पत्नी नाजमा को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार रात करीब दस बजे वे लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शीशगढ़ लेकर पहुंचे तो अस्पताल का मुख्य दरवाजा बंद मिला। वे लोग करीब दो घंटे तक वहां खड़े होकर सीएचसी का दरवाजा खुलवाने का प्रयास करते रहे लेकिन अंदर से न तो कई जवाब मिला और न ही दरवाजा खुला। इसके बाद वे लोग नाजमा को लेकर पीएचसी पहुंचे तो वहां मिली बाहरी नर्स ने प्रसव कराने के तीन हजार रुपये मांगे।
जबूरन वे लोग दोबारा सीएचसी पहुंचे और एक परिचित से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. नैन सिंह का नंबर लेकर उनको फोन पर पूरी बात बताई। इसके बाद उन्होंने फोन करक सीएचसी का दरवाजा खुलवाया। सीएचसी में रविवार सुबह करीब पांच बजे नाजमा ने बेटे को जन्म दिया लेकिन उसके बाद तेज रक्तस्राव शुरू हो गया। हालत बिगड़ती देखकर एएनएम रीवा ने हाथ खड़े कर दिए तो वह नाजमा को लेकर बरेली ले जाने लगे लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
वहीं, नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर कस्बे के एक निजी अस्पताल में ऑक्सीजन लगवानी पड़ी। मृतका के पति ने अस्पताल स्टाफ और एएनएम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय से प्रसव हो जाता तो शायद उसकी पत्नी की जान बच जाती।
वहीं शीशगढ़ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नैन सिंह ने कहा था कि मेरे पास प्रसूता के परिजन ने फोन किया तो मैंने अस्पताल में फोन कर तुरंत उसे भर्ती कराया। अंदर सो रहे स्टाफ को उनकी आवाजें सुनाई नहीं पड़ी होंगी इसीलिए दरवाजा खुलने में देर हुई। सीएचसी में ऑक्सीजन समेत सारी सुविधाएं हैं। अस्पताल में कोई भी लापरवाही नहीं हुई है।
उधर सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल का कहना है कि सीएचसी स्टाफ पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। मामले पर संबंधित स्टाफ से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।