कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) का कार्यालय शुक्रवार को छावनी बना रहा। बृहस्पतिवार को हुए बवाल के बाद परिसर में आरएएफ एवं पीएसी के जवानों की कड़ी चौकसी है। इसके अलावा 29 और अभ्यर्थियों ने सिपाही भर्ती परीक्षा 2015 की मेरिट से संबंधित शिकायत एसएससी मध्य क्षेत्र को सौंपी। वहीं निदेशक ने बताया कि अभ्यर्थियों के रोज-रोज के हंगामे को देखते हुए केंद्र सरकार से कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा गया था। अभ्यर्थियों की ओर से दोबारा गड़बड़ी न हो इसलिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बता दें कि सिपाही भर्ती परीक्षा 2015 की मेरिट में संशोधन को लेकर अभ्यर्थी सोमवार से आंदोलनरत हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की। इस मामले में छह अभ्यर्थी जेल भेज दिए गए थे, जबकि आठ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
वहीं एसएससी की ओर से परिणाम को लेकर शिकायत करने वाले अभ्यर्थियों से प्रत्यावेदन मांगा गया था। इस दौरान आयोग ने सोमवार और मंगलवार को आई 650 शिकायतों की जांच करवाई गई तो उसमें मात्र 541 शिकायतें ही सही फार्मेट में पाई गईं। 109 अभ्यर्थी अपनी शिकायत भी सही तरीके से नहीं कर सके। 541 अभ्यर्थियों की शिकायतों की जांच में 394 के दावे निरस्त हो गए। यह अभ्यर्थी मेरिट में ही नहीं थे, बिना कारण दबाव बना रहे थे। 146 अभ्यर्थियों का दावा सही मिला। इसके अलावा आयोग ने बुधवार और बृहस्पतिवार को आई 145 शिकायतों की जांच शुक्रवार को करवाई तो इसमें मात्र 48 के दावे ही सही मिले। एसएससी मध्य क्षेत्र के निदेशक राहुल सचान का कहना है कि शिकायतों को कार्यालय की ओर से सत्यापन करके अग्रिम कार्रवाई के लिए सीआरपीएफ भर्ती मुख्यालय नई दिल्ली भेज दिया जा रहा है।
सिपाही भर्ती 2015 का रिजल्ट दो फरवरी को घोषित किया गया। रिजल्ट की घोषणा के बाद अभ्यर्थियों ने आरक्षित श्रेणी का सही लाभ न मिलने पर आंदोलन चला रखा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने आवेदन में नक्सल प्रभावित क्षेत्र का दावा किया था, परंतु एसएससी की ओर से घोषित परिणाम में उनको इसका लाभ नहीं मिला। शिकायत में उन्होंने कहा है कि उनके जिले को प्रदेश सरकार की ओर से नक्सल प्रभावित जिले में शामिल करने के बाद भी उन्हें एसएससी ने इसके लाभ से वंचित कर दिया।