स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में जंग खा रही फिजियोथेरेपी विभाग की मशीन। अमर उजाला
स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में आधुनिक मशीनें धूल फांक रही हैं। यहां फिजियोथेरेपिस्ट के कुल तीन पद हैं, जिसमें दो कर्मी सेवानिवृत्त तो एक का पांच साल पहले ट्रांसफर हो चुका है। ऐसे में मरीजों को बाहर से फिजियोथेरेपी करानी पड़ रही है।
सर्जरी के बाद जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने वाली कंटीन्यूअस पैसिव मोशन (सीपीएम मशीन) खराब हो रही है। जोड़ों को मुलायम करने वाली वैक्स बाथ मशीन भी उपयोग में नहीं है। वहीं, एनेस्थीसिया आईसीयू और न्यूरो सर्जरी के मरीजों को बाहर से फिजियोथेरेपिस्ट बुलाना पड़ता है। इसका एक बार में एक हजार रुपये खर्च आता है।
हड्डी रोग विभाग की देखरेख में पांच विद्यार्थी कर रहे इंटर्नशिप
पांच विद्यार्थी फिजियोथेरेपी विभाग में इंटर्नशिप कर रहे हैं। इनको हड्डी रोग विभाग की देखरेख में प्रशिक्षण दिया जाता है। ये इंटर्न हड्डी रोग विभाग के मरीजों को थोड़ी-बहुत फिजियोथेरेपी का लाभ देते हैं। इसके अलावा ये मरीज को प्लास्टर बांधने और ड्रेसिंग करने का काम करते हैं। जब फिजियोथेरेपी से संबंधित सलाह की आवश्यकता होती है तो वह भी हड्डी रोग विभाग ही देता है।
फिजियोथेरेपिस्ट की पोस्ट पांच साल से खाली है। इसके लिए शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। वहीं, हड्डी रोग विभाग की तरफ से छात्र-छात्राओं को गाइड किया जा रहा है।
-डॉ.नीलम सिंह, प्रमुख अधीक्षक, एसआरएन अस्पताल