स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में एक महीने पहले ही एक वरिष्ठ बाबू के वित्तिय गबन के मामले में कार्रवाई के बाद वहां एक दूसरा गबन का नया मामला सामने आया है। जूनियर स्तर का बाबू कागज में हेरफेर कर 88 हजार रुपये मासिक वेतन ले रहा है। इन दो महीनों के दौरान वह बिल में हेरफेर सही तरीके से नहीं कर सका तो मामला पकड़ में आ गया। गबन का मामला सामने आते ही चिकित्सालय में हड़कंप मच गया है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि वे मामले की जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
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चिकित्सालय में मृतक आश्रित कोटे में 2003 से तैनात जूनियर डिविजन क्लर्क ध्रूव कुमार सिंह 88 हजार रुपये प्रतिमाह सैलरी ले रहे हैं। जबकि, उनसे सीनियर क्लर्क का वेतन 55 हजार रुपये है और वे हाल में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसके अलावा वे जिस कार्यालय में तैनात हैं, वहां के प्रशासनिक अफसर की सैलरी 65 हजार रुपये है। ऐसे में जूनियर क्लर्क को 88 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने का मामला चिकित्सालय के दूसरे कर्मचारियों के सामने आने से हड़कंप मच गया है। सवाल खड़े हो गए हैं आखिर जूनियर क्लर्क को कौन से वेतनमान से सैलरी निर्गत की जा रही है। चिकित्सालय के सूत्र बता रहे हैं कि जूनियर क्लर्क अपने पिता बृजनाथ जो कि चिकित्सालय में ट्यूबेल ऑपरेटर के पद पर तैनात थे।
उनके निधन के बाद चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति हुई थी। बाद में प्रमोशन होने से बाबू की श्रेणी में आ गया। वह अपने बिल में हर महीने हेरफेर करता है। सैलरी को कंप्यूटर में भी फीड करा रखा है, जिससे बड़ी आसानी से उसे हर माह 88 हजार रुपये उसके सैलरी खाता में चला रहा है। जूनियर क्लर्क के कार्यालय के प्रशासनिक अफसर राघवेंद्र प्रताप सिंह से इस मामले में पूछताछ की गई तो उन्होंने यह नहीं बताया कि जूनियर बाबू को कितनी सैलरी हर महीने निर्गत की जा रही है। लेकिन, यह कहा कि आपके पूछताछ करने से पहले ही जांच शुरू कर दी गई है। मामले में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। वह इसकी जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।