स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में बन रहा सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक भी कहीं कैंसर और ट्रामा यूनिट की तरह सफेद हाथी साबित न हो। नवनिर्मित ब्लॉक का बुधवार को उद्घाटन होने जा रहा है। इसमें कई महत्वपूर्ण विभागों के सुपर स्पेशियलिटी वार्ड होंगे। अपेक्षा है इलाहाबाद सहित आसपास के कई जिलों के लोगों को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ और दिल्ली जैसे महानगर की ओर नहीं दौड़ना होगा। मगर एसआरएन में इससे पहले शुरू हुई कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का हश्र देखते हुए यह आशंका उठना स्वाभाविक ही है।
एसआरएन में लगभग दस करोड़ रुपये के प्रारंभिक बजट से 2006 में शुरू किया गया ट्रामा सेंटर आज तक कार्यरत नहीं हो सका है। अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल का दर्जा और सुविधाएं देने के लिए अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र द्वारा दाखिल जनहित याचिका में भी यह मुद्दा उठाया गया है। याचिका के साथ आरटीआई में मांगी आडिट रिपोर्ट भी संलग्न की है। आडिट रिपोर्ट में ट्रामा सेंटर का निर्माण पूरा नहीं होने पर गंभीर आपत्तियां की गई हैं। सेंटर के लिए खरीदे गए करीब पांच करोड़ रुपये के उपकरण आज तक डंप पड़े हैं।
कमोवेश एसआरएन की कैंसर यूनिट का भी यही हाल है। मार्च 2005 में कैंसर यूनिट के निर्माण हेतु तीन करोड़ रुपये जारी किए गए थे। करोड़ों की लागत से खरीदे गए उपकरणों को आज तक चालू नहीं किया जा सका। आडिट रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है कि 1.82 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई कोबाल्ट 60 जैसी मशीन आज तक चालू नहीं हो सकी क्योंकि इसके लिए आवश्यक एटॉमिक एनर्जी विभाग का एनओसी प्राप्त नहीं किया जा सका। मशीन को संचालित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति भी नहीं हुई।
आडिट रिपोर्ट में इस बात पर भी आपत्ति उठाई गई है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित न्यूनतम उपकरण की कमी एसआरएन के 15 विभागों में हैं। यह विभाग इन उपकरणों के बिना ही चल रहे हैं। इनमें सर्जरी और रेडियो थेरेपी तथा मेडिसिन जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग भी शामिल हैं।