प्रयागराज के न्यायीपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक डॉ. शिवेश शास्त्री जी महाराज ने जड़भरत चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, वामनावतार, श्रीरामावतार, श्रीकृष्ण जन्म और नन्दमहोत्सव की कथा सुनाई। कथावाचन के दौरान डॉ. शिवेश शास्त्री जी महाराज ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए।
न्यायीपुर गांव में गंगार्थ फाउंडेशन की तरफ से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक डॉ. शिवेश शास्त्री जी महाराज ने पुरंजनोपाख्यान, जड़भरत चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, वामनावतार, श्रीरामावतार, श्रीकृष्ण जन्म और नन्दमहोत्सव की कथा सुनाई। इस कथा के जरिए बताया गया कि मृत्यु के समय मनुष्य का भाव, उसके अगले जन्म को तय करता है।
विज्ञापन
इसी प्रकार प्रह्लाद कथा में बताया गया कि सच्ची भक्ति से विपरीत परिस्थितियां भी व्यक्ति को भगवान की भक्ति से नहीं हटा सकती है। कथा के दौरान बड़ी संख्या न्यायीपुर गांव और आसपास से आए श्रद्धालुओं ने कथावाचक डॉ. शिवेश शास्त्री से अपने मन के सवाल भी पूछे। इस दौरान महाराज जी ने बताया कि किस तरह से मनुष्य अपने दैनिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भी ईश्वर की अराधना कर भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
भागवत के महत्व को समझना जरूरी
कथावाचन के दौरान डॉ. शिवेश शास्त्री जी महाराज ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए। भागवत अमृतरूपी कलश है। इसका रसपान करके मनुष्य अपने जीवन को कृतार्थ कर लेता है। मनुष्य जीवन आदमी को बार-बार नहीं मिलता है, इसलिए कलयुग में दया धर्म भगवान के स्मरण से ही सारी योनियों को पार करता है। मनुष्य को जीवन का महत्व समझते हुए भगवान की भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए।
चार मार्च को होगा महाप्रसाद वितरण
न्यायीपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का पाठ दो मार्च तक चलेगा। तीन मार्च को हवन एवं पूर्णाहुति और चार मार्च को महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इस मौके पर मुख्य यजमान माधुरी देवी त्रिपाठी, अनार देवी त्रिपाठी, माता प्रसाद त्रिपाठी के सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे।