दशाश्वमेध घाट पर सुबह से ही स्नानार्थियों की भीड़ लगने लगी, लेकिन एसडीआरएफ और पुलिस केजवान दूरी बनाकर लोगों को पूजा-अनुष्ठान की सलाह देते रहे। सरस्वती घाट पर भी डुबकी लगती रही। यहां यमुना तट पर स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर में सुबह सात बजे से ही भक्तों की भीड़ लग गई। भीड़ को देखते हुए पुलिस केजवानों ने दूरी बनाकर लाइन लगवा दी।
थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बारी-बारी से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करते रहे। भक्तों ने दूरी बनाकर बाबा का दर्शन पूजन किया। पुजारी श्रीधरानंद ने बताया कि आखिरी सोमवार होने की वजह से श्रद्धालुओं में दिन भर उत्साह बना रहा। इस दिन बाबा का भांग से शृंगार किया गया। इसी तरह दशाश्वमेध घाट स्थित दशाश्वमेधेश्वर महादेव मंदिर में भी दिन भर बेलपत्र, धतूरा,मदार और कनैल के फूलों से बाबा का पूजन-अर्चन होता रहा।
अरैल स्थित सोमेश्वर महादेव में रंग-बिरंगे फूलों से झांकी सजाई गई। शाम को पुष्प शृंगार के बाद पुजारी राजेंद्र पुरी और सोनू पुरी महाराज ने आरती उतारी। दारागंज में गंगा तट पर स्थित नागवासुकि मंदिर व बालसन चौराहा स्थित भरद्वाजेश्वर महादेव मंदिर, पड़िला महादेव व तक्षक तीर्थ में श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई।
संगम पर तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ ही अयोध्या में रामलला के निर्विघ्न भूमि पूजन के लिए अनुष्ठान किए। जगह-जगह अनुष्ठान होते रहे। भक्तों ने संगम की मिट्टी और गंगा जल से अयोध्या में रामलला के जल्द मंदिर निर्माण के लिए पूजा की।