इलाहाबाद। भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण से नाराज युवाओं ने प्रदेश की सपा सरकार पर ‘हरे’ रंग की सियासत का आरोप लगाया है। कहा, सरकार शहीदों के सम्मान के मामले में भी सियासी रंग तलाश रही है। पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले नेताओं की प्रतिमा लगाने और उनके नाम पर चौराहों के नामकरण में मशगूल नगर निगम, वर्षों से रखी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को भी भूल गई है। ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद आजाद प्रतिमा के आसपास सफाई तो कराई गई लेकिन प्रतिमा पर तिरंगा के बजाय ‘हरे रंग की चादर’ डाल दी गई। चेतावनी भी दी कि शहीदों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द ही प्रतिमा उचित स्थान पर न लगाई गई तो आंदोलन किया जाएगा।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महानगर उपाध्यक्ष आदित्यनाथ तिवारी ने दो टूक कहा कि सपा अप्रत्यक्ष रूप से रंगों के आधार पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही है। यह सांस्कृतिक विरासत पर भी चोट है। आजाद की प्रतिमा पर तिरंगे की जगह हरे रंग की चादर डालना सरकार की इसी मानसिकता का परिचायक है। प्रतिमा को ससम्मान स्थापित न किया गया तो कार्यकर्ता सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।
एनएसयूआई के राष्ट्रय सचिव विवेकानंद पाठक ने आरोप लगाया कि सपा सरकार भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई है। प्रदेश में ‘हरे-हरे नोटों’ के बिना कोई काम ही नहीं हो रहा। नौकरियों में भी पैसा सहित जाति और मजहब को चयन का आधार बना दिया गया है। अब आजाद प्रतिमा पर हरे रंग की चादर डालने से यह मंशा उजागर हो गई है। ससम्मान प्रतिमा स्थापित न की गई तो आंदोलन किया जाएगा।
आइसा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील मौर्या का आरोप है कि महापुरुषों की प्रतिमाओं के लिए जगह नहीं जबकि सपा नेताओं की प्रतिमाएं लगाई जा रही हैं। सपा हमेशा से अल्पसंख्यकों की राजनीति करती रही है। आजाद प्रतिमा पर हरी चादर के बहाने यह चेहरा सामने आ गया है। ससम्मान प्रतिमा स्थापना तक आंदोलन जारी रहेगा।