गवाहों का भी कर लिया था इंतजाम
डीसीपी नगर ने बताया कि सचिन ने मां के कत्ल के बाद लूटपाट की कहानी ही नहीं रची, बल्कि कुछ गवाहों का भी इंतजाम कर लिया, ताकि पुलिस के सामने वह अपनी कहानी को सच साबित कर सके। दरअसल वारदात को अंजाम देने के बाद वह उन दो व्यापारियों के पास पहुंचा, जिनका उसपर उधार बकाया था। एक व्यापारी के पास पहुंचकर उसने कहा कि वह उसे बकाया रुपये देना चाहता है और इसके लिए उसे उसके घर चलना होगा क्योंकि नकदी वहीं रखी है।
इस पर उस व्यापारी ने यह कहते हुए जाने से मना कर दिया कि वह बकाया पैसे चेक से लेगा। इसके बाद वह एक दूसरे व्यापारी के पास पहुंचा और फिर यही बात दोहराई। इसपर व्यापारी उसके साथ घर चलने को राजी हो गया। वहां पहुंचते ही सचिन ने रोना-पीटना शुरू कर दिया और चिल्लाने लगा कि किसी ने उसकी मां की हत्या कर नकदी व गहने लूट लिए हैं। पुलिस ने जांच के दौरान उस व्यापारी से पूछताछ की तो यह कहानी सामने आई।
अस्पताल ले जाने की बात पर बोला-मर गई, अब क्या फायदा
सचिन के साथ उसके घर पहुंचे व्यापारी ने पुलिस को एक और बात बताई, जिससे उस पर शक और गहरा गया। बताया कि घर पहुंचने पर उसने सचिन की मां को लहूलुहान हाल में देखा तो उससे कहा कि वह उन्हें अस्पताल ले चले। इस पर सचिन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि अब तो वह मर चुकी हैं, अब अस्पताल ले जाने से क्या फायदा। उस समय उसका यह कहना उसे हैरान कर गया, क्योंकि इस हालत में कोई भी घरवाला घायल व्यक्ति को एक बार डॉक्टर के पास लेकर जरूर जाता।
इन सवालों से भी आया शक के घेरे में
- हत्यारे कान व गले से गहने नोच ले गए तो पैर की पायल व बिछिया क्यों छोड़ी
- मोबाइल को हाथ तक नहीं लगाया
- घर में जो 15 लाख रुपये नकद रखे थे, वह कहां से आए
- इतनी बड़ी मात्रा में नकदी व गहने आगे के कमरे में लापरवाही से क्यों रखे हुए थे
- घर में रखे गहने व नकदी के बारे में पिता को क्यों नहीं दी जानकारी