इलाहाबाद। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हवा में हैं। कभी खबर उड़ती है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है तो, कभी सुनाई देता है कि उन्हें फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। इन तमाम तरह की चर्चाओं के बीच ‘अमर उजाला’ की ओर से अविनाशी श्रीवास्तव ने उनसे लंबी बातचीत की। आरएसएस से जुड़े सवालों को छोड़ दें तो अन्य मुद्दों पर उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी।
सवाल - कार्यभार संभालने के कुछ ही दिन बाद आप विवादों में आ गए। ऐसा क्यों?
जवाब - विश्वविद्यालय में जो टूटा-फूटा सिस्टम था उसके खिलाफ जिम्मेदार अफसरों ने नहीं बोला। शिक्षकों ने भी जैसा चाहा किया। छात्रों को नकल करने दी गई। अराजकता की भी अनदेखी की जाती रही। अब मैंने सख्ती की तो जिन्हें नुकसान हुआ वे खिलाफ खड़े हो गए हैं।
सवाल - आपके इस्तीफे तथा लंबी छुट्टी पर भेजे जाने की चर्चा है।
जवाब - मेरी मंत्रीजी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) और मंत्रालय के अफसरों से बात हुई। मंत्रीजी से कल, बृहस्पतिवार को भी बात हुई। उन्होंने किसी तरह की जांच कमेटी गठित करने की बात से इंकार किया। उन्होंने बताया कि शिकायत मिली है। उस बारे में पूछताछ एक सतत प्रक्रिया है। इससे अधिक कुछ नहीं है।
सवाल - आप पर नियमाें को न मानने तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर फैसले लेने का आरोप है।
जवाब - यह गलत है। कॉलेजाें में पीजी कोर्स शुरू करने का फैसला एकेडमिक काउंसिल का है। ओएसडी की नियुक्ति में 100 लोगों को बुलाया गया। इसके अलावा विवि में वरिष्ठता को लेकर काफी विवाद हैं। विवि के समाजशास्त्र विभाग को अभी अनुमति ही नहीं मिली है। इसके अलावा जो डॉक्यूमेंट थे उस आधार पर प्रो.केएस मिश्रा को वरिष्ठ माना गया। अब न्यायालय का जो फैसला है उसे लागू किया जाएगा। गड़बड़ी साबित होने पर राज्यपाल ने मेरठ विवि के अध्यापक की नियुक्ति निरस्त कर दी है। इस मामले में प्रो.सत्यनारायण के खिलाफ भी टिप्पणी की गई है। इसमें मैं कहां दोषी हूं।
सवाल - भर्ती में मनमानी ...
जवाब - (बीच में रोकते हुए) ओएसडी की नियुक्ति पर लोगों को आपत्ति है। इनकी नियुक्ति पीआरओ और एआर के रिक्त पद के स्थान पर हुई है, वह भी अस्थाई। इनकी भर्ती में भी पूरी प्रक्रिया अपनाई गई है। दूसरा आरोप अध्यापक भर्ती में रोस्टर को लेकर है। रोस्टर 2012 में बना था। इसे 2015 में मंजूरी मिली है। उसी के आधार पर विज्ञापन निकाला गया है। पहले चरण में 290 पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं, जिनके लिए 30 हजार आवेदन पहुंचे हैं। दूसरे चरण में 245 पदों पर भर्ती होनी है। दोनों भर्तियां 2012 में तय रोस्टर के अनुसार होंगी। यूजीसी की नियमावाली-2016 में कुछ संशोधन हुआ है। उसके अनुसार संशोधन हो सकता है।
सवाल - वित्तीय अनियमितता के भी ...
जवाब - रोजाना के खर्च की शीट तैयार की जाती है। उसमें पाई-पाई का हिसाब होता है। तिथिवार खर्च की पूरी फाइल तैयार है। इसे कोई भी देख सकता है।
सवाल - शिक्षकों में आपके तल्ख व्यवहार पर नाराजगी है।
जवाब - कुछ अध्यापक पुनर्नियुक्ति चाहते हैं। मेरा मानना है कि नए लोगों को मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा विभागाध्यक्षों ने लिखकर दिया है कि उन्हें और शिक्षकों की जरूरत नहीं है। मैं इसमें कहां हूं? इसके अलावा कई अध्यापकों और कर्मचारियों ने एडवांस तथा लोन के रूप में 35 करोड़ रुपये लिए हैं। उन्हाेंने रकम वापस नहीं की। जबकि, उनमें से कई रिटायर हो चुके हैं। कई लोगों का तो निधन हो चुका है। अब रिकवरी का आदेश जारी किया गया तो उनमें नाराजगी है। इसी तरह से पत्राचार संस्थान कर्मियों को नियमों के अंगेस्ट भुगतान किया गया है। प्राचीन इतिहास विभाग के रिटायर अध्यापक प्रोफेसर जीके राय को सैप के अंतर्गत 42 लाख रुपये मिले थे लेकिन उन्होंने अब तक हिसाब नहीं दिया। अब हिसाब मांगा जा रहा है। इन फैसलाें से जिन्हें नुकसान हो रहा है वे मेरे खिलाफ खड़े हो गए हैं।
सवाल - कहा जाता है कि आपके इर्द-गिर्द के लोग आपको सही फैसला नहीं लेने देते।
जवाब - (हंसते हुए) मेरा कोई सगा नहीं है और मैं किसी की सुनता भी नहीं हूं। एक ऑफिस में काम करने वालों की पूरी टीम होती है। जरूरत के अनुसार कुछ लोगों को जिम्मेदारी दी गई है लेकिन निर्णय नियमों के अंतर्गत ही लिए जाते हैं।
सवाल - कुछ दागी लोगों को भी आपने बड़ी ...
जवाब - यदि प्रो.बीएन सिंह की बात की जा रही है तो मेरी तरफ से उन्हें पुराना कोई भुगतान नहीं हुआ है। प्रो.जगदम्बा सिंह के प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक का पद छोड़ने के बाद अनुभव को देखते हुए प्रोफेसर बीएन सिंह को यह जिम्मेदारी दी गई।
सवाल - बताया जा रहा है कि आरएसएस के लोग आपको पसंद नहीं करते।
जवाब - संघ के कई शीर्ष तथा स्थानीय नेताआें से मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं। इसके अलावा इस बारे में मैं विस्तार से कुछ नहीं कहना चाहता।
सवाल - केंद्र सरकार के मंत्री तथा सांसदों ने भी आपकी शिकायत की है।
जवाब - नाराज शिक्षक कुछ राजनीतिक लोगों को आगे कर रहे हैं। शिकायतों का जवाब तैयार किया गया है। तीन वाल्युम में तैयार रिपोर्ट में हर आरोप के जवाब और उनके साक्ष्य हैं। मेरी इंस्टीट्यूट के प्रति जवाबदेही बनती है। मैं किसी राजनीतिक दल या संगठन के प्रति जवाबदेह नहीं हूं।
सवाल - छात्रों के निष्कासन पर विवि का कड़ा रुख क्यों?
जवाब - ऐसा नहीं है। कई विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। जिन्होंने व्यवहार बदला उनका निलंबन वापस ले लिया गया है लेकिन कुछ लोग लगातार परिसर में अराजकता फैलाए हुए हैं। वे लोग दबाव बनाकर निष्कासन वापस कराना चाहते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी ही पड़ेगी।
सवाल - आखिरी सवाल। विवि को लेकर आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?
जवाब - नया सत्र शुरू होने से पहले अध्यापकों की नियुक्ति कर ली जाएगी। शेष 245 पदों के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। चार छात्रावास तथा साइंस कॉम्पलेक्स का निर्माण मेरी प्राथमिकता में है।