मुट्ठीगंज थाने में तैनात तीन सिपाहियों ने जमकर गुंडागर्दी दिखाई। एक युवक को चौकी में बंद कर पीटा। साथ ही उससे 42 हजार नकदी व मोबाइल छीन लिए। बाद में छोड़ने के एवज में घरवालों से 35 हजार रुपये भी लिए। भुक्तभोगी ने मामले की शिकायत की तो एसएसपी ने जांच शुरू करा दी है।
आरोप तेंदुआवन निवासी गुड्डू मिश्रा पुत्र सुशील चंद मिश्रा ने लगाया है। उसका आरोप है कि मुट्ठीगंज थाने का एक सिपाही नैनी बाजार में रहता है। आते-जाते उसकी सिपाही से जान-पहचान हो गई। कुछ दिनों पहले सिपाही ने उससे 50 हजार रुपये मांगे, जिस पर उसने इंकार कर दिया। सिपाही रुपयों के लिए बार-बार फोन करने लगा तो उसने कॉल उठाना ही बंद कर दिया। आरोप है कि तीन दिन पहले गुड्डू अपने दोस्त के साथ 42500 रुपये लेकर बालू लेने जा रहा था। तभी मड़ौका हड्डी गोदाम के पास सफेद रंग की कार से आरोपी अपने साथी सिपाही व दो अन्य लोगों के साथ आया और उसे रोक लिया।
इसके बाद गाड़ी में भरकर उसे व उसके साथी को हटिया चौकी लाया गया। साथ ही पैसे छीन लिए गए। कुछ देर बाद चौकी पर कुछ परिचितों के पहुंचने पर दोस्त को तो छोड़ दिया गया लेकिन गुड्डू को थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा गया। आरोपी व उसका साथी सिपाही उसके पैर पर कुर्सी रखकर बैठ गए। साथ ही गालियां देते हुए जमकर पीटा। उधर जानकारी पर मेरे घरवाले आए तो उनसे 35 हजार रुपये लेकर रात में एक बजे छोड़ा गया। साथ ही कागज पर यह लिखकर दस्तखत भी करा लिए कि उसे रुपये व मोबाइल वापस कर दिए गए हैं। भुक्तभोगी युवक ने रजिस्टर्ड डाक से पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर शिकायत की। साथ ही सोमवार को एसएसपी से मिलकर उन्हें प्रकरण की जानकारी दी। जिस पर उन्होंने मामले की जांच शुरू करा दी है।
शिकायत मिली है कि तीन सिपाहियों ने युवक को पीटा। मामले की जांच कराई जा रही है। सीओ बैरहना को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
-नितिन तिवारी, एसएसपी
सूत्रों की मानें तो युवक ने जिन सिपाहियों पर आरोप लगाया है, उनमें से एक लूट के मामले में सस्पेंड हो चुका है। घटना नैनी में हुई थी और तब यह सिपाही नैनी थाने में तैनात था। तब सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में इस सिपाही की तस्वीर भी कैद हो गई थी। जिसके बाद इसे व इसके एक साथी को सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में इनका तबादला भी हुआ लेकिन संाठगांठ कर यह जिले में ही बने रहे। सूत्रों का कहना है कि आरोपी सिपाहियों के कुछ अफसरों के भी चहेते हैं। जो इन्हें इस मामले में भी उन्हें बचाने की जुगत में जुट गए हैं।
मामले की सच्चाई चाहे जो भी हो लेकिन थानों के ‘कारखासों’ पर इस तरह के आरोप कोई नई बात नहीं। आए दिन उन पर वसूली, जुआ, सट्टा समेत अन्य गोरखधंधे चलवाने के आरोप लगते हैं। थानेदारों के खास होने के चलते उन्हें किसी तरह का डर भी नहीं होता। ऐसे में यह बेखौफ होकर अवैध कामों में लिप्त रहते हैं। फायदा मिलने से थानेदार भी इनकी गतिविधियों पर आंखें बंद किए बैठे रहते हैं। यही नहीं उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचने पर वह पाक-साफ बताकर इनकी पैरवी भी करते हैं।