मुठभेड़ में घायल गैंगरेप के आरोपी गुलशन त्रिपाठी को एसआरएन अस्पताल से भगाने में सिपाही पवन कुमार मददगार था। विवेचना के दौरान इस बात का खुलासा होने पर कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उधर, फरार बंदी की तलाश लगातार चौथे दिन भी जारी रही, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
सरायअकिल में नाबालिग से गैंगरेप के मामले में पुलिस ने 20 फरवरी को मुठभेड़ के दौरान आरोपी गुलशन को गिरफ्तार किया था। उसे घायल हालत में एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां से 22 फरवरी की रात वह सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को चकमा देकर गायब हो गया था। मामले में सुरक्षा में लगे दो सिपाहियों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच पड़ताल में पुलिस को चौंकाने वाली बात पता चली। मालूम हुआ कि घटना से कुछ देर पहले ही कौशाम्बी में तैनात सिपाही पवन कुमार अस्पताल में गुलशन से मिलने आया था। यही नहीं, उसने फोन पर उसकी किसी से बात भी कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। जांच में यह भी बात सामने आई कि मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले पवन को कोविड ड्यूटी के लिए कुछ दिनों के लिए प्रयागराज में तैनाती दी गई थी।
कोतवाली इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि संलिप्तिता की बात सामने आने पर मुकदमे में बंदी को हिरासत से भगाने की धाराओं की बढ़ोतरी कर सिपाही पवन को आरोपी बनाया गया। शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट पेश में किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। उधर, कौशाम्बी पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि आरोपी सिपाही पहले ही निलंबित कर दिया गया था।
तैनाती के दौरान आया था संपर्क में
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में पता चला है कि आरोपी सिपाही फरार हुए बंदी गुलशन से सरायअकिल थाने में तैनाती के दौरान संपर्क में आया था। दरअसल गुलशन भी उसी थाना क्षेत्र का रहने वाला है। मुठभेड़ में उसके घायल होकर एसआरएन अस्पताल पहुंचने की खबर मिली तो सिपाही उससे मिलने गया।