हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि ‘एक ओर अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य विकसित देशों में लोग ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कार का हॉर्न भी बजाने से बचते हैं, इसे खराब व्यवहार मान रहे हैं। वहीं भारत में लोग अब भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि शोर भी प्रदूषण है। इससे सेहत को नुकसान होता है।’ हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण से बहरापन, हाई बीपी, अवसाद, थकान, और लोगों में चिड़चिड़ापन हो सकता है। अधिक शोर हृदय व दिमाग को नुकसान करता है।
अनुमति के बिना लाउड स्पीकर नहीं बजा सकते
हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) नियमावली 2000 में बनाई थी। इनके अनुसार हॉर्न, तेज ध्वनि पैदा करने वाले उपकरण, लाउड स्पीकर, आदि पर जगहों के अनुसार प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे में बिना पूर्व अनुमति के इनका इस्तेमाल नहीं किया सकता। इस अनुमति के लिए केंद्र या प्रदेश सरकार डीएम, पुलिस आयुक्त या कम से कम डीएसपी स्तर के अधिकारी को नामित कर सकती है।
अधिकारियों-नागरिकों, सभी का दायित्व है भाईचारा बढ़ाना
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के दायित्व दिए गए हैं। किसी घटना से तनाव होता है, वे उसे सुलझाते हैं, तनाव घटाना भी उनके जिम्मे है। संविधान मूल कर्तव्यों में अधिकारियों सहित हर नागरिक से अपेक्षा करता है कि वे सामाजिक सौहार्द व भाईचारे को बढ़ावा देंगे। इसमें धार्मिक, भाषाई या जातिगत विविधताओं को बाधा नहीं बनने देंगे। शांति बिगाड़ने वाले हर घटनाक्रम को रोकेंगे।
बद्दोपुर गांव का मामला ऐसा था
याचिका में जौनपुर की शाहगंज तहसील के बद्दोपुर गांव के मसरूर अहमद व अन्य मुस्लिम समुदाय के नागरिकों ने बताया था कि एसडीएम ने मस्जिद अबू बकर सिद्दीकी में लाउड स्पीकर और एम्प्लीफायर लगाने की अनुमति 15 जनवरी से 14 जुलाई 2018 तक के लिए दी थी। क्षेत्र में ही मौजूद एक अन्य मस्जिद रहमानी के लिए ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई थी। कुछ समय बाद रिपेयर करने के लिए उपकरण हटाए गए। जब इन्हें वापस लगाया जा रहा था तो क्षेत्रीय पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मसरूर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मार्च 2019 में याची को निर्देश दिए कि वे अनुमति के लिए एसडीएम को फिर से अर्जी दें। यह अर्जी दी गई और एसडीएम ने शाहगंज के सीओ से रिपोर्ट मंगवाई। सीओ ने मई 2019 में रिपोर्ट दी कि क्षेत्र में हिंदू व मुस्लिम समुदायों की मिलीजुली आबादी रहती है। एक पक्ष को लाउड स्पीकर लगाने की अनुमति दी तो क्षेत्र की शांति प्रभावित होगी। एसडीएम और सीओ ने गांव का दौरा किया और पाया कि साउंड एम्प्लीफायर की वजह से क्षेत्र में तनाव है। ऐसे में एसडीएम ने किसी भी धर्म स्थल पर ये उपकरण लगाने की अनुमति नहीं दी।