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अभी तक पांच फीसदी ही हो पाई है गेहूं की खरीद

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so far only five percent of wheat procurement
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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहे किसानों की मुसीबत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। अब गेहूं खरीद को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। स्थिति यह है कि 15 दिनों में लक्ष्य के सापेक्ष पांच प्रतिशत भी खरीद नहीं हो पाई है। शुक्रवार तक मात्र 4130 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हो पाई है। जबकि, पिछले वर्ष एक मई तक इसके तीन गुने से भी अधिक की खरीद हो चुकी थी।
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जिले में इस साल 82 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। जिले में कुल 92 गेहूं क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं लेकिन सुस्ती का आलम यह है कि मात्र 82 पर ही खरीद शुरू हो पाई है। 10 केंद्रों पर खरीद शुरू नहीं हो पाई है। इसके अलावा गेहूं खरीद के मानक को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। इस बार गेहूं की उपज काफी पतली हुई है। इसलिए गेहूं सिकुड़न और टूटन की मात्रा छह से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किए जाने की मांग की गई है लेकिन शासन की ओर से इस पर अभी कोई आदेश नहीं आया है। अफसरों का कहना है कि इस तरह की समस्या पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही अधिक है। इसलिए मानक में शिथिलता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसका असर भी गेहूं खरीद पर पड़ने की बात कही जा रही है। इसका नतीजा है कि एक मई तक 1064 किसानों से मात्र 4130.57 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो पाई है। इसके विपरीत पिछले वर्ष इस अवधि तक 13719 मीट्रिक टन हो गई थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि जो खरीद हुई है उसमें से भी मात्र 718 मीट्रिक टन गेहूं एफसीआई के गोदाम तक पहुंचा है। चूंकि गेहूं की गुणवत्ता को लेकर एफसीआई की ओर से आपत्ति जताई जा चुका है। ऐसे में गेहूं के भंडारण को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है।

so far only five percent of wheat procurement

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