इनमें 175 को आईसीयू और 75 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया। चिकित्सकों के मुताबिक इसका कारण यह था कि सर्पदंश से पीड़ित मरीजों को समय से अस्पताल नहीं लाया जा सका। चिकित्सकों के अनुसार अगर सांप काटने के चार घंटे के अंदर मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसे वेंटिलेटर या आईसीयू में रखने की नौबत नहीं आती है। एंटी स्नैक वेनम इंजेक्शन के जरिये समय रहते इलाज हो जाता है।
अधिकतर लोग अस्पताल जाने के बजाय ओझा-तांत्रिक का सहारा लेने लगते हैं। मरीज जब मरणासन्न अवस्था में पहुंच जाता है, तब उसे अस्पताल लाते हैं। जहर का असर खत्म करने में दो-तीन दिन का समय लग जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि सांप काटने के 48 घंटे के बाद मरीज का शरीर पैरालिसिस का शिकार होने लगता है।
बिच्छू व का भी खतरा
बिच्छू काटने के भी पांच मामले एसआरएन अस्पताल में आ चुके हैं। इसके अलावा 35 लोग जहरीले कीड़े के काटने से अस्पताल पहुंचे हैं।
प्रयागराज में हैं सांपों की दो प्रजातियां
प्रयागराज में जहरीले सांप की दो प्रजातियां पाई जा रही हैं। इनमें एक करैत और दूसरा नाग है। इनके काटने के अगर चार घंटे के अंदर मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। वहीं चार घंटे के बाद मरीज को ठीक होने में 8-10 दिन का समय लग जाता है।
अक्सर लोग सांप काटने पर खुद से काटने वाली जगह का चीर-फाड़ करने में लग जाते हैं, जो गलत है। जिस जगह सांप काटे, उस स्थान को ज्यादा हिलाए-डुलाएं नहीं।जल्द से जल्द मरीज को अस्पताल पहुंचाएं। - डॉ. सुजीत वर्मा, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।
अगर स्नैक बाइट के मरीज को चार घंटे के अंदर एंटी स्नैक वेनम की डोज लगा दी जाए तो उसकी जान आसानी से बचाई जा सकती है। - डॉ. राजीव सिंह, निदेशक, नारायण स्वरूप हॉस्पिटल।
जिले में स्नैक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता है। सांप काटने के बाद किसी भी झाड़फूंक के चक्कर में पड़ने की बजाए, लोगों को सीधे नजदीकी अस्पताल जाना चाहिए, ताकि उपचार से जान बचाई जा सके। सभी ब्लॉकों की सीएचसी में एंटी स्नैक इंजेक्शन उपलब्ध है। - डॉ. आशु पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी।