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Prayagraj News: कार्बन का विकल्प बन रहे स्मार्ट मैटेरियल, पर्यावरण और स्वास्थ्य की करेंगे रक्षा

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प्रयागराज। भविष्य में मकान, सड़क, पुल बड़े से बड़ा झटका भी झेलने में सक्षम होंगे। भूकंप के झटके को भी बहुत हद तक झेल लेंगे। इतना ही नहीं मकान और कार को मनचाहा आकार भी दिया जा सकेगा। यह संभव होने जा रहा है स्मार्ट मैटेरियल से। खास यह कि स्मार्ट मैटेरियल मजबूत और टिकाऊ तो हैं ही, पर्यावरण को भी इनसे नुकसान नहीं है। इन खुबियों की वजह से इन्हें भविष्य का मैटेरियल बताया जा रहा है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में शुक्रवार को आयोजित व्याख्यान में रॉयल सोसाइटी ऑफ केमेस्ट्री के फेलो तथा यूनिवर्सिटी साउदर्न डेनमार्क के प्रोफेसर योगेंद्र कुमार मिश्र ने स्मार्ट मैटेरियल के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध के बारे में विस्तार से चर्चा की।
प्रोफेसर योगेंद्र ने सिरैमिक आधारित स्मार्ट मैटेरियल के बारे में बताया। उनका कहना था कि अभी तक मैटेरियल लंबा, गोलाकार, गार्ड आदि आकार में बनाए जाते रहे हैं लेकिन अब टेट्रा पॉड स्ट्रक्चर में बनने लगे हैं। ये हल्का होने के साथ काफी मजबूत होते हैं। सिरैमिक आधारित स्मार्ट मैटेरियल को मनचाहा आकार भी दिया जा सकेगा। इसलिए इनसे बने मकान, सड़क, पुल आदि बनाए जाने लगे हैं। हालांकि अभी इस तकनीकी का इस्तेमाल कुछ देश ही कर रहे हैं। भारत में मैरीन ड्राइव में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
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प्रोफेसर योगेंद्र ने जिंक ऑक्साइड आधारित टेट्रा पॉड स्ट्रक्चर के बारे में भी बताया। उनका कहना था कि यह लचीला और चिकना होने के साथ जीवाणुरोधी भी है। इसलिए किचन के जार, बोतल समेत अन्य वस्तुओं के निर्माण में इनका इस्तेमाल होने लगा है। एंटी वैक्टेरियल कपड़े, बैंडेज आदि का निर्माण भी शुरू हो चुका है। उन्होंने हाइड्रोजन समेत अन्य तत्वों पर आधारित स्मार्ट मैटेरियल के बारे में भी बताया। प्रोफेसर योगेंद्र ने कहा कि इससे स्मार्ट फोन में भी क्रांतिकारी परिवर्तन होने जा रहा है। 62 तत्वों को मिलाकर स्मार्ट मैटेरियल का निर्माण हो रहा है जो मोबाइल को बहु उपयोगी बना देगा।
संयोजक प्रोफेसर कैलाशनाथ उत्तम ने कहा कि स्मार्ट मैटेरियल हरित और टिकाऊ प्रौद्योगिकी है। उन्होंने बताया कि अभी कार्बन का अधिक इस्तेमाल होता है, जिनका तेजी से क्षय होता है। इससे ये कमजोर तो पड़ ही जाते हैं, पर्यावरण को भी खतरा बन गया है। ऐसे में हरित और टिकाऊ प्रौद्योगिकी की जरूरत पूरे विश्व में की जा रही है। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी इस पर रिसर्च हो रहे हैं। आने वाले दिनों में मकानों, सड़कों, पुलों, घरेलू वस्तुओं, कपड़े आदि के निर्माण में इनका इस्तेमाल बढ़ेगा। इस दौरान प्रोफेसर विनोद प्रकाश, प्रोफेसर रामकृपाल, प्रोफेसर फूल सिंह समेत अनेक शिक्षक, शोधर्थी मौजूद रहे।
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