स्मार्ट सिटी के दौड़ में इलाहाबाद अभी भले ही पिछड़ गया हो लेकिन इसको लेकर प्रयास जारी है। ऐसा नहीं है कि स्मार्ट सिटी बनाने का प्रयास सिर्फ भारत में ही हो रहा है। ब्राजील, दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अपने शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इस काम में सहयोग कर रहे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान से एमटेक तथा वर्तमान में दक्षिण कोरिया के हांकुक यूनिवर्सिटी ऑफ फारेन स्टडीज में प्रोफेसर डॉ.धनंजय सिंह ने इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी कैसे बनाएं इसका प्रारूप तैयार किया है। अप्रवासीय भारतीय दिवस के उपलक्ष्य में लखनऊ में आयोजित होने वाले समारोह में शामिल होने के लिए आए डॉ.धनंजय ने इस प्रारूप को अमर उजाला से साझा किया।
‘शहर में टेक्नोलॉजी का विस्तार बहुत कठिन है। सड़क बनाने के लिए खोदाई करनी होगी। इससे लोग परेशान होंगे। अन्य तकनीकी तथा ढांचागत विकास के क्रम में भी लोगाें को परेशानी उठानी होगी। इसके लिए लोग आसानी से तैयार नहीं होंगे। जबकि, गांवों में सभी तरह की तकनीकी का विस्तार आसान होगा। दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे देश स्मार्ट सिटी के बजाय स्मार्ट विलेज बनाते हैं। इस तरह से कई स्मार्ट विलेज को मिलाकर स्मार्ट सिटी बनाया जाता है। इलाहाबाद काफी बड़ा जिला है। इसे ध्यान में रखकर शहर के चारो तरफ मनौरी, झूंसी, नैनी, फाफामऊ के आसपास के क्षेत्र में गांव चिह्नित करने होंगे। क्षेत्र की जरूरतें जैसे, आवागमन, खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पहलुओं को ध्यान में रखकर तकनीकी और ढांचागत विकास का प्रारूप तैयार करना होगा। चयनित गांवों के स्कूलों को तकनीकी विकास के केंद्र में रखा जाना चाहिए। वहीं से सभी योजनाओं और तकनीकी को संचालित किया जा सकता है। इस विकास का सीधे शहर से लिंक होगा। यानी, इसका सीधा लाभ शहर को भी होगा। इस प्रारूप में स्मार्ट सिटी बनाने के कांस्पेक्ट की तुलना में काफी कम खर्च होगा।
इसके अलावा इलाहाबाद संगम नगरी है। इसके भीतर हर छह साल में एक नया शहर बस जाता है। स्मार्ट सिटी और स्मार्ट गांव के किसी प्रारूप में कुंभ और अर्द्धकुंभ जैसे महाआयोजन को केंद्र में रखना होगा। संगम क्षेत्र में ऐसे स्थायी निर्माण करने होंगे, जिन्हें बाढ़ में हटाने की जरूरत न हो। साथ में आसपास के कस्बों और गांवों को स्मार्ट बनाने पर ध्यान देना होगा। कुंभ और अर्द्धकुंभ के दौरान लाखों लोगों के आने के साथ भारी संख्या में छोटे-बड़े वाहन भी आते हैं। इसके मद्देनजर आवागमन, पार्किंग आदि का ध्यान रखना होगा। संगम क्षेत्र के हर इंट्री प्वाइंट से प्रवेश करने वाले लोगों को चिप लगी हुई आईडी देने की व्यवस्था होनी चाहिए। उसे अन्य तकनीकी से भी लिंक होना चाहिए। इससे सभी पर नजर रखी जा सकेगी। साथ में लोगों के लिए भी सुविधा होगी। इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट गांव बनाने का प्रारूप तैयार किया है। इसमेें इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। अप्रवासी दिवस समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष यह प्रस्ताव रखा जाएगा।’ -डॉ.धनंजय सिंह