चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसने वाले महाकुंभ में पांटून पुलों के निर्माण के लिए कराए गए टेंडर में नियमों को दरकिनार करने की बात सामने आ रही है। दरअसल, साल स्लीपर की आपूर्ति के लिए यह टेंडर 14 जून को खोला गया, लेकिन इसके लिए वित्तीय स्वीकृति का आदेश शासन ने दस दिन बाद 24 जून को जारी किया है। शासनादेश के मुताबिक तकनीकी स्वीकृति प्राप्त किए बिना यदि कोई निविदा आमंत्रित कर भी ली जाती है, तो उसकी फाइनेंसियल बिड नहीं खोली जानी चाहिए।
महाकुंभ के लिए संगम की रेती पर बसने वाली तंबुओं की नगरी में प्रवेश के लिए गंगा पर 30 पांटून पुलों का निर्माण किया जाना है। इसके लिए 9400 घनमीटर साल स्लीपर की जरूरत है। इन पांटून पुलों का निर्माण लोक निर्माण विभाग को कराना है। साल स्लीपर की आपूर्ति के लिए पीडब्ल्यूडी ने देश भर के वन निगमों से संपर्क किया था। साल स्लीपर के टेंडर में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शासन ने छह सदस्यीय समिति भी गठित की थी। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता विजय कन्नौजिया की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में उत्तर प्रदेश वन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक, अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी देवेंद्र कुमार सिंह, वित्त नियंत्रक कुंभ मेला, अधिशासी अभियंता विद्युत यांत्रिक खंड और अधिशासी अभियंता निर्माण खंड चार शामिल हैं।
इस कमेटी ने कार्य कराए जाने की प्रत्याशा में पांच जून को ही तकनीकी बिड कराई। इसके बाद 14 जून को टेंडर खोल दिया गया। इसमें शामिल छत्तीसगढ़, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश की 12 कंपनियों में से एक एन मोहनलाल वुड प्रोडक्ट को अयोग्य घोषित किया गया। जबकि, इस टेंडर में हिस्सा लेने वाली 11 फर्मों को पात्र करार दिया गया।
महाकुंभ के पांटून पुल, पुलिया के अस्थायी कार्यों के लिए शासन की ओर से 236.82 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। 197 करोड़ रुपये के साल स्लीपर की आपूर्ति के लिए इस कुल 79 हजार से अधिक साल स्लीपर और 8766 साल एजिंग की खरीद की जानी है। तंबुओं की नगरी में प्रवेश के लिए सेक्टरवाइज गंगा पर गंगा पर बनने वाले 30 पांटून पुलों और छह पुलियों के निर्माण के लिए कुल 9400 घनमीटर साखू की लकड़ी की जरूरत है। जबकि, शासनादेश में नियंत्रक महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन का हवाला देते हुए कहा गया है कि बिना प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्राप्त किए कसी भी कार्य की निविदा आमंत्रित न की जाए। विशेष परिस्थितियों में शासन की सहमति और अनुमोदन के उपरांत अपरिहार्य कार्यों के लिए वित्तीय हस्त पुस्तिका वैल्यूम-6 में निर्गम नियमों का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही कहा गया है कि बिना तकनीकी स्वीकृति प्राप्त किए अगर कोई निविदा आमंत्रित भी कर ली जाती है तो उसकी वित्तीय बिड न खोली जाए।
बिना वित्तीय स्वीकृति के वर्क आर्डर जारी करने में निलंबित हो चुके हैं अधिशासी अभियंता
प्रयागराज। साल स्लीपर की आपूर्ति की प्रक्रिया वर्ष के शुरुआती दिनों में ही विवादों में घिर चुकी है। तब अरुणाचल प्रदेश वन निगम के जुड़ी फर्म को 99 करोड़ रुपये के साल स्लीपर की आपूर्ति का आर्डर देने वाले पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को शासन ने निलंबित कर दिया था। बिना प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के टेंडर कराने का उन पर आरोप लगा था। इसी के बाद शासन स्तर पर साल स्लीपर के टेंडर के लिए छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी।
इस टेंडर के लिए एपेक्स कमेटी का अनुमोदन लिया गया था। पूर्व में इस मामले में जिस अधिशासी अभियंता को निलंबित किया गया था, उन पर बिना प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के कार्यादेश जारी करने का भी आरोप है। इस बार अभी तक कार्यादेश जारी नहीं किया गया है।
विजय किरन आनंद, कुंभ मेलाधिकारी।
यह टेंडर कमेटी की देखरेख में कराया गया है। किसी एक व्यक्ति की इसमें जिम्मेदारी नहीं है। इस पर मैं किसी तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता।
देवेंद्र कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, पीडब्लयूडी