गोरा बनने के चक्कर में एक साल में 55 लोग चर्मरोगी बन गए हैं। यह आंकड़ा सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय(एसआरएसन) का है। यहां चर्म रोग विभाग में हर महीने करीब पांच मामले सामने आ रहे हैं।
सोशल मीडिया व टीवी पर मात्र एक हफ्ते में गोरे बनें...अपने चेहरे पर निखार लाएं, जैसे विज्ञापनों से प्रभावित होकर इन युवाओं ने तमाम प्रकार की क्रीम, फेस वॉश का इस्तेमाल किया। चेहरा पूरी तरह सफेद व जलन होने पर एसआरएन पहुंचे।
यहां भविष्य में बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी क्रीम व फेस वॉश इस्तेमाल नहीं करेंगे कि शपथ दिलाने के बाद इलाज शुरू किया गया। कुछ ऐसे ही मामले नजीर के तौर पर हैं।
पेश है पुनीत त्रिपाठी की एक रिपोर्ट...
केस-1
प्रतापगढ़ निवासी 21 वर्षीय युवक दो साल से गोरा बनने के चक्कर में तमाम प्रकार के विज्ञापनों में दिखाई गईं क्रीमों का इस्तेमाल कर रहा था। सुंदर होने के बजाय चेहरे पर सफेद दाग और जलने पर कई माह तक परेशान इधर-उधर इलाज के लिए भटकता रहा। इस चक्कर में लाखों रुपये बर्बाद कर दिए। मई में वह एसआरएन के चर्म रोग विभाग इलाज कराने पहुंचा तो पता चला उसे चर्मरोग हो गया है। एक महीने के इलाज के बाद अब उसे थोड़ी राहत मिली है।
केस-2
राजरूपपुर निवासी 35 वर्षीय महिला की नाक के पास तिल बराबर काला धब्बा था। उसने विज्ञापन व सोशल मीडिया को देखकर कई क्रीम इस्तेमाल की। इससे वह धब्बा तीन सेंटीमीटर चेहरे पर फैल गया और महिला की स्किन जल गई। दो माह पहले यह महिला एसआरएन के चर्म रोग विभाग आई। जहां इलाज के बाद 50 फीसदी आराम मिला है। अभी भी उसका इलाज चल रहा है।
केस-तीन
18 वर्षीय एक बीए की छात्रा ने गोरी होने के लिए विज्ञापन में दिखाई गई तरह-तरह की क्रीम व लोशन का अपने चेहरे पर इस्तेमाल किया। इसकी वजह से उसके चेहरे पर ढेर सारे दाने हो गए। वहीं, तीन महीने पहले जब वह एसआरएन के चर्म रोग विभाग आई तो चिकित्सकों ने इलाज शुरू करने से पहले उसको शपथ दिलाई कि वह भविष्य में कभी बिना चिकित्सक की सलाह के कोई क्रीम व लोशन नहीं लगाएगी। फिलहाल, अब छात्रा का चेहरा बिल्कुल ठीक है।
कई लोगों की त्वचा काफी संवेदनशील होती है। ऐसे में बिना चिकित्सक की सलाह के किसी भी प्रकार की क्रीम व लोशन लगाना हानिकारक हो सकता है। कई लोगों की त्वचा तो इलाज के बाद भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकी है।-डॉ.अमित शेखर, चर्म रोग विभागाध्यक्ष, एसआरएन, प्रयागराज