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नहीं रहे एसके व्यास, कर्मचारियों में शोक की लहर

Sat, 14 Feb 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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कर्मचारियों के बीच ‘लीडर ऑफ द लीडर्स’ के नाम से चर्चित कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्पलाइज ऐंड वर्कर्स के संरक्षक एसके व्यास का शुक्रवार रात निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। जयपुर के एक अस्पताल में वह कई दिनों से भर्ती थे ओर वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी, दो पुत्रों और दो पुत्रियों से भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। राष्ट्रीय स्तर के कर्मचारी नेता के निधन से कर्मचारियों में शोक की लहर है।
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एसके व्यास एजी ऑफिस जयपुर में ऑडीटर के पद से रिटायर हुए थे। मूलत: जोधपुर (राजस्थान) के रहने वाले व्यास का इलाहाबाद से गहरा नाता था। इलाहाबाद कर्मचारियों का गढ़ है, सो यहां उनका अक्सर आना-जाना होता था। तमाम बड़े आंदोलनों की पृष्ठभूमि उनके नेतृत्व में इलाहाबाद में ही तैयार की गई। केंद्रीय कर्मियों की वर्ष 1966, 1968 और 1974 में राष्ट्रीय स्तर पर हुई हड़ताल के वह मुख्य सूत्रधार रहे।

 दूसरे वेतन आयोग से लेकर छठवां वेतन आयोग लागू होने तक कर्मचारी संगठनों की तरफ से जो भी मेमोरेंडम आयोग को सौंपे गए, उन्हें व्यास के दिशा-निर्देशन में ही तैयार किया गया। यहां तक कि ऑफीसर्स एसोसिएशन भी अपना मेमोरेंडम तैयार करने में व्यास की मदद लेती थी। वह 1969 से 1981 तक आल इंडिया ऑडिट ऐंड एकाउंट्स एसोसिएशन महासचिव रहे तो 1989 में अध्यक्ष बने। 1991-92 से 2006 तक कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इम्पलाइज ऐंड वर्कर्स के महासचिव रहे।
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2006 के बाद कनफेडरेशन के अध्यक्ष बने। बाद में उन्होंने जब खुद ही अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए कहा तो कर्मचारियों के आग्रह पर वह कनफेडरेशन के संरक्षक बनने को तैयार हो गए। कनफेडरेशन में तकरीबन सभी केेंद्रीय संगठन शामिल हैं। उनके निधन की खबर आते ही इलाहाबाद में कर्मचारियों के बीच शोक की लहर दौड़ पड़ी।
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